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क्या थमेगा रूस यूक्रेन युद्ध, ट्रंप ने किया नई सहमति का ऐलान

SHIDDHANT
15 Sept 2026 12:02 AM IST
क्या थमेगा रूस यूक्रेन युद्ध, ट्रंप ने किया नई सहमति का ऐलान
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एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नहीं होंगे हमले ट्रंप ने किया रूस यूक्रेन समझौते का दावा
Washington. वॉशिंगटन। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले नहीं करने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि इस कथित सहमति को लेकर कई अहम सवाल अभी बाकी हैं। ट्रंप ने यह नहीं बताया कि व्यवस्था कब से लागू होगी, कितने समय तक चलेगी और इसके उल्लंघन की निगरानी किस तरह की जाएगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि यूक्रेन रूसी ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाने पर सहमत हुआ है और रूस ने भी ऐसा ही करने पर सहमति जताई है। ट्रंप की घोषणा फिलहाल ऊर्जा प्रतिष्ठानों तक सीमित है। इसे रूस और यूक्रेन के बीच व्यापक युद्धविराम की घोषणा नहीं माना जा सकता।
ट्रंप के बयान में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि ऊर्जा ठिकानों की श्रेणी में किन प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाएगा। बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडारण केंद्र, पाइपलाइन और ट्रांसमिशन नेटवर्क को लेकर अलग-अलग शर्तें हैं या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की प्रतिक्रिया ने तस्वीर को और जटिल बना दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन रूसी ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से ठोस भरोसा चाहिए कि रूस भी यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे, बुनियादी सुविधाओं और खाद्य आपूर्ति मार्गों पर हमले बंद करेगा। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप की ओर से घोषित व्यवस्था की शर्तों और क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को वैश्विक स्तर पर डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से भी जोड़ा। उनका कहना है कि दुनिया में डीजल की कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह रूस-यूक्रेन युद्ध है। इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन से रूसी डीजल और तेल रिफाइनरी से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने को कहा था। हाल के महीनों में यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों से रूस के ईंधन उत्पादन पर असर पड़ा है। दूसरी तरफ रूस की ओर से भी यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है। इस कारण नागरिक बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में यदि दोनों पक्ष ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की किसी स्पष्ट और सत्यापित व्यवस्था पर अमल करते हैं तो इसका असर युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों के साथ ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल इसे पूर्ण युद्धविराम की दिशा में निर्णायक समझौता कहना जल्दबाजी होगी। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि दोनों पक्ष किन शर्तों के तहत हमले रोकेंगे और किसी उल्लंघन की स्थिति में उसकी पुष्टि कौन करेगा। ट्रंप के दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। आने वाले आधिकारिक बयानों और दोनों पक्षों की जमीनी कार्रवाई से ही साफ होगा कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले वास्तव में रुकते हैं या नहीं।
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