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धोखेबाज कॉकरोच, कांग्रेस-आप, इंडी की सरकारों को क्यों छोड़ रहे
jantaserishta.com
4 Aug 2026 11:00 AM IST

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पंजाब-केरल, झारखंड, कर्नाटक छात्र आंदोलन तूफान पर, यहां बीजेपी की सरकार नहीं...
> जेन-जी का गुस्सा...सड़कों पर मशाल लेकर उतरे छात्र कांग्रेस-आप, इंडी संगठन की सोरेन सरकार कटघरे में
> दिल्ली विरोध प्रदर्शन में रोज़ टन भर खाना बांटने वाले जुनैद खान का पर्दाफाश हो गया। जंतर मंतर में खाना बांटने वाले जुनैद को रांची से आंदोलनकारी छात्रों ने मदद मांगी तो जुनैद ने फोन बंद कर दिया। जुनैद ने उसे ब्लॉक कर दिया उसकी बात है कि या तो नाम से दिक्कत थी या झारखंड में विरोध के लिए विदेशी फंडिंग नहीं मिली ।
> अभिषेक दिपके आंदोलित छात्रों को बीमारी का बहाना बताकर अभी तक साथ नहीं दिया, यहीं पर दिखता है दोगला पन, यहां पर कांग्रेस समर्पित सरकार है, सौरभ दास और उसके समर्थक नेहा ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सिर से सिंग
> कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के शिक्षा मंत्री जो खड़गे के बेटे हैं उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारे यहां आंदोलन खतनाक हो जाने दो फिर हम लाठी चार्ज करेंगे उसके बाद इस्तीफा दूंगा
> झारखंड के शिक्षामंत्री खुद मु यमंत्री हेमंत सोरेन इनके कारनामे तो और गजब के है राज्य में जितनी भी परीक्षा हुई है उसमें सभी पेपर दो-तीन बार लीक हुए हैं हद तब हुई पेपर लीक होने के बाद भी फिर से परीक्षा में भी तीन बार पेपर लीक हुए जेपीसीएससी में तो सीधा सीट बेचने का आरोप छात्रों ने लगाया। ऐसी संस्था से परीक्षा आयोजन का ठेका दिया गया है जो लगभग सभी बड़े प्रदेशों में प्रतिबंध है और ब्लैक लिस्ट में शामिल है
> पंजाब में आप की सरकार है विगत कई माह से पेपर लीक मामले में छात्र आंदोलनरत है मनीष सिसोदिया ने जंतर मंतर में कहा था कि हमारे पंजाब में अगर पेपर लीक होता है तो 1 मिनट में शिक्षामंत्री का इस्तीफा ले लेंगे, लेकिन जब अपनी पारी आई तो केजरीवाल और सिसोदिया अपनी बात से मुकर गए
रांची (जसेरि)। देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर लंबा आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब खुद सवालों के घेरे में है। वजह है झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा विवाद। राजधानी रांची की सड़कों पर हजारों की तादाद में छात्र उतरे हुए हैं। 25 जुलाई से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब पूरे राज्य में आग की तरह फैल चुका है। बढ़ते दबाव के बीच JPSC के अध्यक्ष लालबियाकतलुंगा खिआंगते (L. Khiangte) अपना इस्तीफा दे चुके हैं और CID की जांच में 11 लोग सलाखों के पीछे पहुंच गए हैं।
लेकिन सवाल सिर्फ राज्य सरकार पर ही नहीं उठ रहे, सवाल उस कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की नीयत पर भी हैं, जो NEET के समय तो केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर दहाड़ रही थी, पर झारखंड घोटालों पर रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठी है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि क्या परीक्षा में गड़बड़ी का मुद्दा सरकार देखकर उठाया जाएगा?
रांची का ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस समय युवाओं के आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। 'JSSC-JPSC भ्रष्टाचार मुक्त अभियान' के बैनर तले लगभग 5,000 छात्र संविधान की कॉपियां और तिरंगा हाथ में लेकर सड़कों पर पैदल मार्च निकाल चुके हैं।
यह आंदोलन हाल ही में हुई JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ। 25 जुलाई से रांची में छात्रों ने धरना शुरू किया। शुरुआत छोटी थी, लेकिन कुछ ही दिनों में यह राज्यव्यापी आंदोलन बन गया। हजारों छात्र राजधानी पहुंचने लगे। 29 जुलाई को बड़ी रैली निकली। प्रदर्शनकारियों ने हाथ में तिरंगा और संविधान लेकर मार्च किया।
छात्रों की मांग सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है। वे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पूरे भर्ती सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि झारखंड बनने के बाद से भर्ती परीक्षाओं पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं और हर बार युवाओं का भविष्य दांव पर लगता है।
छात्रों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि 26 साल पहले राज्य बनने के बाद से ही हर भर्ती परीक्षा किसी न किसी घोटाले की भेंट चढ़ जाती है। प्रदर्शनकारी पोस्टर लेकर खड़े हैं, जिन पर JPSC का मजाक उड़ाते हुए इसे 'झोल-झाल पब्लिक सर्विस कमीशन' लिखा गया है। एक और बैनर पर तंज कसा गया, "जब केंद्र में 56 इंच वाले को झुकना पड़ा, तो राज्य में 56 सीट वाले को भी झुकना पड़ेगा।"
हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन छात्र अब सिर्फ आश्वासनों से मानने को तैयार नहीं हैं। उनका अगला लक्ष्य 6 अगस्त को विधानसभा का घेराव करना है।
आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं हैं। कई अभिभावक, सामाजिक संगठन, अलग-अलग छात्र संगठन और कोचिंग से जुड़े शिक्षक भी समर्थन देने पहुंच रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर लोग खाने-पीने का सामान, पानी और दूसरी जरूरी चीजें भी पहुंचा रहे हैं।
JPSC परीक्षा मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए हैं। जांच के बीच JPSC चेयरमैन एल. खियांगते ने भी इस्तीफा दे दिया। यही नहीं, डिजिटल सबूत भी जुटाए जा रहे हैं और कई जगह छापेमारी की गई है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन प्रदर्शन कर रहे छात्र इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बयान नहीं, ठोस फैसला चाहिए।
इस पूरे आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि मंच पर किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नजर नहीं आ रहा है। राष्ट्रगान से दिन की शुरुआत होती है और मंच पर भगवान बिरसा मुंडा, महात्मा गांधी और बाबा साहेब आंबेडकर की तस्वीरें लगी हैं। स्थानीय लोग छात्रों की मदद के लिए खाना, पानी, रेनकोट और पैसे तक दान कर रहे हैं।
हालांकि ABVP, AISA, आदिवासी छात्र संघ (ACS) और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) जैसे संगठन नैतिक समर्थन दे रहे हैं। JLKM के नेता देवेंद्र महतो का कहना है, "हम यहां छात्र के रूप में खड़े हैं, क्योंकि राज्य के युवा 26 सालों से लगातार छले जा रहे हैं।"
मई 2026 में सोशल मीडिया और दिल्ली के जंतर-मंतर पर रातों-रात मशहूर हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का नाम तो आपको याद ही होगा? वही CJP जिसने NEET पेपर लीक मामले पर ऐसा माहौल बनाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा था। अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरव दास जैसे चेहरे युवाओं की आवाज बनकर उभरे थे।
लेकिन जैसे ही मामला कांग्रेस-JMM शासित झारखंड का आया, CJP के तेवर पूरी तरह ढीले पड़ गए। झारखंड में JPSC की धांधली में पूर्व परीक्षा नियंत्रक तक गिरफ्तार हो चुके हैं। इसके बावजूद CJP ने न तो कोई विरोध प्रदर्शन किया, न ही मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग की। ऐसे में अब लोग पूछ रहे हैं कि जब झारखंड में भी परीक्षा से जुड़ा बड़ा विवाद सामने है, तो CJP की वैसी सक्रियता क्यों नहीं दिख रही?
अब तक CJP ने झारखंड को लेकर कोई बड़ा धरना, रैली या इस्तीफे की मांग वाला अभियान शुरू नहीं किया है। पार्टी की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया है कि वह मामले को देख रही है और जल्द अपना रुख साफ करेगी।
CJP के इस दोहरे रवैये ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आप से भाजपा में आए सांसद ने सीधा हमला बोलते हुए इसे 'आम आदमी पार्टी की B-टीम' करार दिया है। उनका आरोप है कि अरविंद केजरीवाल के करीबियों ने मिलकर यह संगठन खड़ा किया था ताकि विरोधी सरकारों को घेरा जा सके और अपनी सरकार के पापों पर पर्दा डाला जा सके।
NEET मामले पर अमेरिका से सीधे दिल्ली आकर प्रदर्शन करने वाले अभिजीत दीपके का झारखंड के घोटालों पर 'अध्ययन मोड' में चले जाना लोगों को हजम नहीं हो रहा है। यहीं से CJP पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। संगठन ने अपनी पहचान परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की आवाज उठाने वाले मंच के रूप में बनाई थी। उसका संदेश था कि चाहे किसी भी सरकार की बात हो, अगर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ होगा तो वह विरोध करेगा।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि झारखंड जैसे मामलों में उसी तेजी और आक्रामकता की कमी दिख रही है, जो NEET आंदोलन के दौरान दिखाई गई थी। इसी वजह से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में CJP पर 'Selective Outrage' यानी चुनिंदा मुद्दों पर ही सक्रिय होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
दूसरी तरफ CJP की ओर से अभी तक इस आलोचना का जवाब नहीं आया है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि अगर कोई संगठन परीक्षा प्रणाली की सफाई की बात करता है, तो उसे हर राज्य में एक ही चश्मे से देखना होगा।
चाहे सरकार BJP की हो, AAP की हो या JMM-कांग्रेस की। जब तक CJP झारखंड के मामलों पर खुलकर सामने नहीं आती, तब तक उस पर 'सिलेक्टिव राजनीति' और 'खास एजेंडे' के तहत काम करने के आरोप लगते ही रहेंगे।
इधर झारखंड में छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रदर्शनकारी पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि 6 अगस्त को विधानसभा मार्च निकाला जाएगा। आयोजकों का दावा है कि इस बार पहले से ज्यादा छात्र और सामाजिक संगठन इसमें शामिल होंगे।
छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए है। वे चाहते हैं कि दोषियों पर कार्रवाई के साथ ऐसी व्यवस्था बने, जिससे भविष्य में किसी परीक्षा पर सवाल न उठे।
वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा का पोस्ट, लिखा- झारखंड में छात्र सड़क पर लेकिन कॉकरोच पार्टी वाले से लेकर केजरीवाल और राहुल गांधी सब नदारद है..
ऐसा दावा किया जा रहा...
झारखंड छात्र आंदोलन से एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि आंदोलन के मंच पर पहुंचे किन्नर समुदाय के एक व्यक्ति ने प्रदर्शनकारी छात्रों के भोजन के लिए ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी।
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