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कौन हैं संजीव सान्याल? बन सकते हैं बंगाल के नए वित्त मंत्री, तेज हुई चर्चाएं
jantaserishta.com
18 May 2026 10:04 AM IST

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राज्य में दूसरी सबसे पॉवरफुल पोस्ट वित्त मंत्री के लिए संजीव सान्याल का नाम सामने आ रहा है.
Sanjeev Sanyal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, और वो नाम किसी राजनेता का नहीं बल्कि एक ऐसे अर्थशास्त्री का है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े बैंकों और भारत सरकार की फाइलों में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है. हम बात कर रहे हैं संजीव सान्याल की. 4 मई को जब बंगाल चुनाव के नतीजों ने इतिहास रचा, तो सान्याल ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट लिखा- "समय की देवी कालचक्र को घुमाती है. "
इस एक लाइन ने इशारा कर दिया था कि बंगाल की सत्ता के गलियारों में कुछ बड़ा होने वाला है. अब चर्चा तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद भरोसेमंद सलाहकार संजीव सान्याल बंगाल के नए वित्त मंत्री बन सकते हैं.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ने पर एक नई अटकलों का बाजार गरम हो गया है. अटकलें शुरू हो गई है कि क्या नंदीग्राम सीट से पश्चिम बंगाल के भावी वित्तमंत्री चुनाव लड़ने वाले हैं. चर्चा शुरू हो गई है कि पीएमओ में आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्यरत अर्थशास्त्री संजीव सान्याल क्या पश्चिम बंगाल के अगले वित्तमंत्री बनने वाले हैं. क्या सीएम सुवेंदु अधिकारी उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव में उतारेंगे.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से अपना इस्तीफा दे दिया है. अब वह भवानीपुर सीट से विधायक बने रहेंगे. सुवेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों से जीत हासिल की थी. उनके इस्तीफे के बाद अब बंगाल की राजनीति में दो बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. पहला सवाल यह है कि नंदीग्राम सीट से उपचुनाव कौन लड़ेगा? दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि पश्चिम बंगाल का अगला वित्त मंत्री कौन बनेगा?
संजीव सान्याल देश के एक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के ही रहने वाले हैं. वर्तमान में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक प्रमुख सदस्य हैं. यह परिषद भारत सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री को आर्थिक मामलों पर निष्पक्ष और विशेषज्ञ सलाह देने के लिए गठित एक स्वतंत्र और गैर-संवैधानिक निकाय है.
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ अभी सिर्फ पांच मंत्रियों ने ही शपथ ली है. कैबिनेट का विस्तार होना अभी बाकी है. यही वजह है कि फिलहाल वित्त मंत्रालय जैसा अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ही देख रहे हैं. इसके अलावा गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और वाणिज्य जैसे भारी-भरकम मंत्रालय भी उन्हीं के पास हैं.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उसके पास राज्य में ऐसा कोई अनुभवी विधायक नहीं है, जिसे अर्थव्यवस्था की बहुत गहरी समझ हो. ऐसे में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल को बंगाल का वित्त मंत्री बनाने की चर्चाएं सबसे तेज हैं.
शुरुआती शिक्षा: उनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स स्कूल और सेंट जेम्स स्कूल से हुई.
हायर एजुकेशन: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन (BA) किया.
रोड्स स्कॉलर: वे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप में से एक रोड्स स्कॉलरशिप (Rhodes Scholar) जीतकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए, जहां से उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की.
बैंकिंग से लेकर सरकार के सलाहकार तक
इंटरनेशनल बैंकिंग: सरकार में आने से पहले वे ड्यूश बैंक में ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं.
भारत सरकार में भूमिका: वे करीब 5 सालों तक भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे और देश के आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही. वर्तमान में वे प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्णकालिक सदस्य हैं.
लेखक और इतिहासकार: संजीव सान्याल सिर्फ अर्थशास्त्री ही नहीं बल्कि बेहद मशहूर लेखक भी हैं. उनकी किताबें जैसे "लैंड ऑफ द सेवन रिवर्स" और "रिवोल्यूशनरी" काफी चर्चा में रही हैं.
बीजेपी के लिए किसी अनुभवी और बाहरी विशेषज्ञ अधिकारी को सीधे शीर्ष राजनीतिक पदों पर लाना कोई नई बात नहीं है. केंद्र सरकार में इसके कई बड़े उदाहरण पहले से मौजूद हैं. देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी इसके सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं. इन दोनों को भी विशेषज्ञता के आधार पर सरकार में शामिल किया गया था.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में भी संजीव सान्याल को बेहद सक्रिय देखा गया था. वे वहां पारंपरिक बंगाली धोती-कुर्ता पहनकर पहुंचे थे. उनके साथ उनकी पत्नी स्मिता बरुआ भी मौजूद थीं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में महिला मतदाताओं का समर्थन जुटाने में स्मिता बरुआ ने बीजेपी की काफी मदद की थी.
4 मई को चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से संजीव सान्याल लगातार मीडिया में सक्रिय हैं. उन्होंने कई इंटरव्यू दिए हैं और समाचार पत्रों के लिए लेख भी लिखे हैं. इन लेखों में उन्होंने बंगाल के आर्थिक पतन पर चिंता जताई है. साथ ही राज्य को इस ठहराव से बाहर निकालने के उपाय भी सुझाए हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में भावुक होकर कहा था, कोलकाता मरा नहीं है, बल्कि उसकी हत्या की गई है, और मैं खुद इस बात का गवाह हूं.’
संजीव सान्याल का पारिवारिक इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है. वे देश के महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्र नाथ सान्याल के पर-भतीजे हैं. सचिंद्र नाथ सान्याल वही महान क्रांतिकारी थे, जिन्हें शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद का गुरु माना जाता था. इसके अलावा संजीव सान्याल के परदादा नलिनक्षा सान्याल भी राजनीति में सक्रिय थे. वे अविभाजित बंगाल प्रांतीय विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) रहे थे.
बीजेपी के करीबी एक अर्थशास्त्री ने बताया कि संजीव सान्याल के पास बंगाली जड़ों और वैश्विक अनुभव का एक बेहतरीन मेल है. वे बंगाल को भावनात्मक और बौद्धिक दोनों ही स्तरों पर बहुत गहराई से समझते हैं. इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी पूरा अनुभव है कि आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक स्तर पर किस तरह काम करती हैं.
पिछले कुछ दशकों में पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हुई है. पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल जीडीपी (GDP) में बंगाल का हिस्सा लगातार कम हो रहा है. साल 1960-61 में देश की जीडीपी में बंगाल का हिस्सा 10.5% था, जिससे यह देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था. लेकिन साल 2023-24 में यह हिस्सा घटकर महज 5.6% रह गया है और राज्य अब 24वें स्थान पर खिसक गया है.
इसके अलावा, बंगाल के लोगों की प्रति व्यक्ति आय जो कभी राष्ट्रीय औसत का 127.5% हुआ करती थी, वह अब घटकर सिर्फ 80% रह गई है. यह उस राज्य का हाल है जो कभी भारतीय उद्योगों का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था. इसके साथ ही राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है. इस भारी-भरकम कर्ज को संभालना नई बीजेपी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
संजीव सान्याल ने अपने इंटरव्यू में बंगाल की खोई हुई शान को वापस लाने का एक पूरा विज़न पेश किया है. उन्होंने कहा कि पूरे पूर्वी भारत को फिर से आर्थिक रूप से मजबूत करने का रास्ता कोलकाता को फिर से बसाने से होकर गुजरता है.
उन्होंने आगे कहा कि दशकों की गिरावट के बावजूद कोलकाता के पास ऐतिहासिक फायदे हैं. यहां पहले से ही औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं, जिनमें पूरे पूर्वी भारत के विकास को गति देने की क्षमता है. उन्होंने यह भी साफ किया कि बंगाल की यह गिरावट सिर्फ आर्थिक नहीं थी, बल्कि समय के साथ यहां की सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थाएं भी बहुत कमजोर की गईं, जिन्हें अब सुधारने की जरूरत है.
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