भारत

जब सुप्रीम कोर्ट बोला- जजों को प्रताड़ित करना मकसद?, जाने क्या था पूरा मामला

jantaserishta.com
23 Nov 2021 5:26 PM IST
जब सुप्रीम कोर्ट बोला- जजों को प्रताड़ित करना मकसद?, जाने क्या था पूरा मामला
x

नई दिल्ली: अमेजन-फ्यूचर रिटेल मामले (Amazon-Future Group Case) के बाद दायर याचिकाओं में पक्षकारों की ओर से भारी मात्रा में दस्तावेज दाखिल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नाराजगी जताई है. कोर्ट ने मंगलवार को नाखुशी जताते हुए कहा कि क्या मकसद सिर्फ मामले को लंबे समय तक खींचना या जजों को प्रताड़ित करना है. साथ ही, कोर्ट ने दस्तावेजों का एक साझा और संक्षिप्त संकलन मांगा है.

चीफ जस्टिस एन. वी. रमण, जस्टिस ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की बैंच ने पक्षकारों के वकीलों से कम मात्रा में दस्तावेज दाखिल करने को कहा, ताकि मुद्दे को सुलझाया जा सके और मामले की अगली सुनवाई आठ दिसंबर के लिए लिस्टेड कर दी.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा, 'मुझे दुख के साथ आप सभी से कहना पड़ रहा है कि रिकॉर्ड के 22-23 सेक्शन दाखिल करने में क्या आनंद मिलता है. दोनों पक्षों ने बार-बार कितनी संख्या में दस्तावेज दाखिल किये हैं और क्या यह मामले को महज लंबा खींचने या फिर न्यायाधीशों को प्रताड़ित करने के मकसद से किया गया है.' फ्यूचर ग्रुप की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि यह पूरी तरह से गैरजरूरी है और सुझाव दिया कि दोनों पक्ष चर्चा कर सकते हैं. साथ ही शॉर्ट लिखित नोट के साथ एक साझा दस्तावेज दाखिल कर सकते हैं.
बैंच ने कहा, 'दस्तावेजों के सेक्शन ढूंढने में समस्या है, हमें कुछ समय दीजिए. एक काम करिये, क्या आप जिन दस्तावेजों पर भरोसा कर रहे हैं उनका एक संक्षिप्त संकलन तैयार कर सकते हैं. भारी मात्रा में कल दस्तावेज दाखिल किये गये.' इस बीच, बैंच ने आईडीबीआई ट्रस्टशिप को अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी और कहा कि वह अपनी याचिका के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय जा सकता है.
यह याचिका फ्यूचर रिटेल शेयर पर हाई कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक हटाने की मांग करते हुए दायर की गई थी. शीर्ष न्यायालय, दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ फ्यूचर ग्रुप की एक नई याचिका पर सुनवाई कर रहा है. हाई कोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप की याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया था जिसके जरिये सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएसी) के इमरजेंसी फैसले में दखल करने से एक मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
एसआईएसी ने उसे रिलायंस रिटेल के साथ 24,731 करोड़ रुपये के विलय करार पर आगे बढ़ने से रोक दिया था. बैंच अमेजन की भी एक जवाबी याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें नियामकों को विलय करार को मंजूरी देने से रोकने की अपील की गई है.
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story