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चावल बेचते भाई ने पकड़ा तो छोटी बहन ने की खुदकुशी

Nilmani Pal
11 July 2025 6:33 AM IST
चावल बेचते भाई ने पकड़ा तो छोटी बहन ने की खुदकुशी
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यूपी। चित्रकूट में 10 बरस की बच्ची के डर, स्वाभिमान और अंत की यह दास्तान किसी को भी रुला देगी। उसका मन बिस्किट-नमकीन खाने का था। घर में यह चीजें नहीं थीं। उसने घर से आधा किलो चावल चुरा कर बेच दिए। दस रुपये मिले, जिनसे बिस्किट-नमकीन खरीद कर खाए। दो साल बड़े भाई ने देख लिया तो धमका दिया। पापा से बता दूंगा कि तू ने चावल बेचे हैं। पिता की डांट- मार और अपने अपमान की सोच कर बच्ची घबरा गई। वह पापा से इस कदर डर गई कि खामोशी से घर लौटी और फांसी पर झूल गई।

जिस पिता के डर से उसने दुनिया छोड़ दी, वह रो-रो कर सिर पटक रहा है। मां अचेत हो रही है। अब भाई-बहन बिलख रहे हैं। उस बच्ची को अब कौन बताए कि मां-बाप उसकी याद में तड़प रहे हैं। भाई की धमकी उसका बचपना थी। पूरा गांव अब उस पर पूरी फसल न्योछावर करने को तैयार है। कलेजे झकझोर देने वाली यह दास्तान रैपुरा कस्बे की है। यहीं रहते हैं राज कुमार। वह बताते हैं-शालिनी दस साल की थी। चुलबुली और दिनभर खिलखिलाने वाली। बुधवार शाम उसका मन बिस्किट-नमकीन खाने का था। घर में दोनों ही चीजें नहीं थीं। उसने कटोरे में करीब आधा किलो चावल निकाले और पास ही दुकान में जाकर बेच दिया। दस रुपये में चावल बिके।

उसने एक-एक पैकेट बिस्किट-नमकीन खरीदा। 12 साल के बड़े भाई विपिन ने उसे देख लिया। उसने यह कहकर डराया कि पापा से बता देगा कि बहन ने चावल चुरा कर बेचे हैं। शालिनी डर गई। पापा राज कुमार व मां गौरा घर के पास ही बाहर कुछ काम कर रहे थे। डरी-सहमी शालिनी कमरे में गई और कपड़े टांगने के लिए लगे बांस में साड़ी का फंदा बना कर झूल गई। कुछ देर बाद छोटा भाई प्रियांश पहुंचा तो बहन को लटका देख कर रो पड़ा। माता-पिता पहुंचे। उसे फंदे से नीचे उतारा और कस्बे के प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां से जिला अस्पताल लाए। शालिनी तब तक दम तोड़ चुकी थी। वह दो भाइयों के बीच अकेली बहन थी। इंस्पेक्टर विनोद शुक्ला ने कहा कि बच्ची ने एक कटोरा चावल बेच कर बिस्किट-नमकीन खरीदे थे। भाई ने धमका दिया तो परेशान होकर खुदकुशी कर ली। इस बिलखते परिवार के आंसुओं से धुल कर गई बातें साफ दिख रही हैं। पिता बच्ची का यह विश्वास नहीं जीत सके कि कुछ भी हो जाए, पापा का प्यार कम न होगा।मां यह भरोसा न अर्जित कर सकी कि बिटिया की इज्जत से बढ़ कर उसके लिए कुछ भी नहीं है। .. और सबसे बड़ा गम यह कि विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में एक ऐसी भी बिटिया थी, जिसे बिस्किट-नमकीन चखने के लिए एक कटोरा चावल बेचने का गुनाह करना पड़ा। दुनिया शालिनी को क्यों याद रखेगी.. अलबत्ता जब उसका भाई बुजुर्ग होगा.. यह सोनचिरैया जरूर उसके सपनों में आकर रुलाएगी।


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