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‘हम हिंदुस्तान के दुश्मन नहीं’, फारूक अब्दुल्ला बोले- वतन के साथ तरक्की करेंगे

SHIDDHANT
24 Oct 2026 10:01 PM IST
‘हम हिंदुस्तान के दुश्मन नहीं’, फारूक अब्दुल्ला बोले- वतन के साथ तरक्की करेंगे
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आत्मनिर्भरता और सम्मान पर दिया जोर
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वे हिंदुस्तान के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि देश के साथ तरक्की करना चाहते हैं। उन्होंने अपने संबोधन में देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वे इसी वतन के साथ आगे बढ़ेंगे और इसी के साथ मरेंगे। हालांकि, कश्मीर को लेकर उनके बयान ने राजनीतिक चर्चा को भी हवा दी है।
‘हम हिंदुस्तान के दुश्मन नहीं’
फारूक अब्दुल्ला ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मंशा देश के खिलाफ काम करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि वे भारत के साथ तरक्की करना चाहते हैं और देश के भविष्य में अपनी भागीदारी निभाना चाहते हैं। उनके इस बयान में देश के साथ आगे बढ़ने और अपनी पहचान बनाए रखने पर जोर दिखाई दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख ने कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि देश के साथ मिलकर विकास करना जरूरी है।
कश्मीर को लेकर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला?
अपने संबोधन में फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “कश्मीर को पाकिस्तान बचा रहा है, हिंदुस्तान के इरादे नेक नहीं हैं। उनकी इस टिप्पणी में भारत की कश्मीर नीति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद रहा है। ऐसे में फारूक अब्दुल्ला का यह बयान चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि, उनके इस दावे के समर्थन में उपलब्ध जानकारी में कोई विस्तृत तथ्य या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इस टिप्पणी को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
आत्मनिर्भरता और सम्मान पर दिया जोर
फारूक अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में लोगों के आत्मनिर्भर बनने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे, तब तक उन्हें इज्जत हासिल नहीं हो सकती। उनकी इस बात का आशय आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनने की आवश्यकता से जुड़ा है। आत्मनिर्भरता के जरिए लोग अपनी स्थिति बेहतर कर सकते हैं और समाज में सम्मान के साथ जीवन जी सकते हैं।
बयान के राजनीतिक मायने
फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। उनके बयान अक्सर क्षेत्र की राजनीति, केंद्र सरकार की नीतियों और भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का विषय बनते रहे हैं। इस बार उन्होंने एक ओर भारत के साथ तरक्की करने और वतन के साथ रहने की बात कही, वहीं दूसरी ओर कश्मीर को लेकर भारत के इरादों पर सवाल उठाए। उनके संबोधन के इन दोनों पहलुओं को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल, उनके बयान का पूरा संदर्भ और इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
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