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रिश्तेदारों ने शव लेने से किया इनकार
Varanasi वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार की कहानी ने लोगों को भावुक कर दिया। लक्सा थाना क्षेत्र के एक होम स्टे में ठहरे विशाल मुखर्जी, उनकी पत्नी जया मुखर्जी और बेटे ईशान मुखर्जी की अलग-अलग घटनाक्रम में मौत हो गई थी। पुलिस ने परिवार के रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन कोई भी शव लेने या अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंचा। तीन दिनों के इंतजार के बाद पुलिस की मौजूदगी में सामाजिक संस्था की मदद से हरिश्चंद्र घाट पर तीनों का अंतिम संस्कार कराया गया।
मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले 55 वर्षीय विशाल मुखर्जी करीब 15 साल पहले काम के सिलसिले में महाराष्ट्र चले गए थे। बाद में वहीं बस गए। उनके साथ 52 वर्षीय पत्नी जया और 27 वर्षीय बेटा ईशान भी रहते थे। परिवार 7 अगस्त को महाराष्ट्र के रायगढ़ से वाराणसी पहुंचा था और लक्सा थाना क्षेत्र के एक गेस्ट हाउस में ठहरा था। बताया गया कि 9 अगस्त की रात विशाल मुखर्जी की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसके अगले दिन यानी 10 अगस्त की देर शाम होम स्टे में जया और ईशान की भी मौत हो गई। बताया गया कि दोनों ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और परिवार के रिश्तेदारों को घटना की जानकारी दी।
पुलिस ने प्रयागराज के कर्नलगंज में रहने वाली विशाल की बहन और बहनोई समेत कई रिश्तेदारों से संपर्क किया। बताया गया कि बहन ने पुलिस को कहा कि करीब 12 साल पहले ही उनका अपने भाई और भाभी से संबंध टूट चुका था। अन्य रिश्तेदारों ने भी अंतिम संस्कार में आने से इनकार कर दिया। पुलिस को रिश्तेदारों से परिवार की आर्थिक परेशानियों के बारे में भी जानकारी मिली। दावा किया गया कि विशाल ने बड़ी रकम का कर्ज लिया था, जबकि उनके बेटे ईशान पर भी कर्ज था। परिवार में बीमारी और इलाज पर काफी पैसा खर्च होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन परिस्थितियों और मौतों के बीच संबंधों को लेकर पुलिस जांच महत्वपूर्ण है।
तीन दिनों तक शवों को लेने कोई रिश्तेदार नहीं पहुंचा। इसके बाद सामाजिक संस्था अमन कबीर ट्रस्ट की मदद से अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया गया। अमन कबीर ने लक्सा पुलिस की देखरेख में हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। तीनों सदस्यों के लिए एक ही चिता तैयार की गई। विशाल, जया और ईशान को एक साथ अंतिम विदाई दी गई तो घाट पर मौजूद लोगों के बीच माहौल गमगीन हो गया। रिश्तेदारों की गैरमौजूदगी में पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई।
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