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मुहर्रम जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारे का वायरल वीडियो निकला फर्जी, दो गिरफ्तार

Shantanu Roy
24 Jun 2026 1:55 PM IST
मुहर्रम जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारे का वायरल वीडियो निकला फर्जी, दो गिरफ्तार
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बड़ी खबर
Bareilly. बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मुहर्रम के जुलूस के दौरान कथित रूप से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि वीडियो में किया गया दावा भ्रामक था और इसे जानबूझकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तथा लोगों को गुमराह करने के उद्देश्य से तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

यह मामला बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र के गांव खाईखेड़ा का है। कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा था कि मुहर्रम के जुलूस के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए गए। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और सोशल मीडिया पर इसे लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने वीडियो की सत्यता की पड़ताल के लिए तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच कराई।

जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने वायरल वीडियो की पूरी कहानी बदल दी। पुलिस के अनुसार, जांच में पाया गया कि गांव खाईखेड़ा निवासी योगेंद्र पाल और भुवनेश कुमार ने कथित तौर पर एक बच्चे से कुछ विवादित शब्द बुलवाए और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया। बाद में इस वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया मानो मुहर्रम के जुलूस के दौरान पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए गए हों। पुलिस का कहना है कि वीडियो को भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर प्रसारित कर लोगों के बीच भ्रम और तनाव फैलाने का प्रयास किया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह मामला सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने और सांप्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश से जुड़ा हुआ प्रतीत हुआ। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया आज सूचना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका दुरुपयोग कर झूठी और भ्रामक खबरें फैलाना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में प्रशासन पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म, समुदाय या आयोजन को लेकर गलत जानकारी फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस घटना के बाद पुलिस ने आम नागरिकों से भी विशेष अपील की है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो, फोटो या संदेश को बिना सत्यापन के साझा न करें। कई बार पुराने, संपादित या संदर्भ से हटकर प्रस्तुत किए गए वीडियो समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसलिए किसी भी संवेदनशील सामग्री को आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करना जरूरी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।

ताकि किसी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ सामग्री को समय रहते रोका जा सके। इसके लिए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीमें सक्रिय हैं। डिजिटल युग में फर्जी वीडियो और भ्रामक सूचनाएं समाज के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। कई बार कुछ लोग व्यक्तिगत, राजनीतिक या सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए झूठी सामग्री तैयार कर उसे वायरल कर देते हैं। ऐसे मामलों में समय पर जांच और तथ्य सामने आना बेहद जरूरी होता है ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। बरेली पुलिस की इस कार्रवाई को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यदि इस प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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