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नेपाल में हिंसक प्रदर्शन: काठमांडू में आगज़नी में तबाह हिल्टन होटल

Shantanu Roy
10 Sept 2025 6:45 PM IST
नेपाल में हिंसक प्रदर्शन: काठमांडू में आगज़नी में तबाह हिल्टन होटल
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Kathmandu. काठमांडू। नेपाल में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री के.पी. ओली की सरकार को उखाड़ फेंका है। नौजवानों के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों ने पूरे देश में उथल-पुथल मचा दी है, जिसके चलते नेपाल सेना को नियंत्रण अपने हाथ में लेना पड़ा और देशव्यापी कर्फ्यू लगाना पड़ा है।


युवाओं का गुस्सा और आगजनी
सोमवार को शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने सत्ता के केंद्र को निशाना बनाया और संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, राजनीतिक दलों के कार्यालयों, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के आवासों को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, काठमांडू के ऐतिहासिक सिंह दरबार को भी नहीं बख्शा गया। इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने देश के सबसे आलीशान और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले हिल्टन होटल को भी आग लगा दी। बौद्ध प्रार्थना झंडियों से प्रेरित अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए मशहूर यह होटल, लांगटांग पर्वत श्रृंखला के शानदार नजारों के लिए जाना जाता था। इसकी क्षति को नेपाल के सांस्कृतिक ताने-बाने पर एक बड़ा आघात माना जा रहा है।


सेना का नियंत्रण और कर्फ्यू
विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने और प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे के बाद, नेपाल की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सेना ने बुधवार को मोर्चा संभाला। नेपाल सेना ने संभावित अशांति को रोकने के लिए पूरे देश में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए और कर्फ्यू की घोषणा कर दी। सेना ने चेतावनी दी है कि इस दौरान किसी भी तरह की लूटपाट, आगजनी या तोड़फोड़ को आपराधिक कृत्य माना जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सैनिकों को लूटपाट और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तैनात किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। हालांकि, एंबुलेंस, दमकल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों और कर्मियों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। सेना ने अपने बयान में कुछ समूहों द्वारा हालात का अनुचित लाभ उठाने और नागरिकों तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
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