
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने साफ तौर पर कहा है कि उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने स्टोर रूम में कोई नकदी नहीं रखी थी. उन्होंने कहा, “यह आरोप पूरी तरह से हास्यास्पद है.” रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मौके पर मौजूद पुलिस और फायर ब्रिगेड टीम को चार से पांच अधजली नोटों की गड्डियां मिली थीं.
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय द्वारा सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया कि 15 मार्च की सुबह, जिस कमरे में आग लगी थी, वहां से मलबा हटाया गया था. गार्ड के मुताबिक, वहां से अधजली अन्य चीजों के साथ जली हुई नकदी भी बरामद हुई. रिपोर्ट के अनुसार, “बंगले में रहने वाले लोग, घरेलू सहायक और सरकारी कर्मियों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति के वहां पहुंचने की संभावना नहीं दिखती.”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस मामले की “गहन जांच की आवश्यकता है.” सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद अब मामला और गंभीर हो गया है. वीडियो फुटेज और रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इस पूरे प्रकरण पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है.
दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस वर्मा के घर पर जले हुए इंसाफ के बंडल सबूत बनकर सामने आए!! pic.twitter.com/qKYXIAUsuM
— ASHUTOSH MISHRA (@JournoAshutosh) March 22, 2025





