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बांग्लादेश ने हमें रास्ता दिखाया
दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का बांग्लादेश के छात्र संगठन सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) को संबोधित एक वीडियो चर्चा में है। इसमें उन्होंने बांग्लादेश के युवा आंदोलन की सराहना करते हुए भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की तुलना वहां लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों को लेकर हुए आंदोलनों से की है।
🚨 SHOCKING!! Neha Bora talks to Bangladeshi SSF which led the COUP against Sheikh Hasina👇 "We RED salute you. We congratulate you for SHOWING US THE WAY and extending solidarity to the young people of this nation. > We know that the movement which started in Bangladesh was for DEMOCRATIC & voting rights. Today, the movement in which young people are participating in India is likewise a movement for DEMOCRATIC and VOTING RIGHTS. We know that the fight you are waging against RELIGIOUS FUNDAMENTALISM in your country is the same fight that young people here are waging today."🤯 Case is wide open. They're drawing straight parallels from a movement that led to STREET ANARCHY in Bangladesh!!
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) October 14, 2026
जानकारी के मुताबिक, नेहा बोरा ने सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर वीडियो संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने संगठन को लाल सलाम करते हुए बांग्लादेश के युवाओं के आंदोलन से प्रेरणा लेने की बात कही।
नेहा बोरा ने कहा कि बांग्लादेश में शुरू हुए आंदोलन ने युवाओं को रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा कि भारत में भी युवा लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए आंदोलनों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के युवा भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। साथ ही दोनों देशों के युवाओं के बीच एकजुटता की उम्मीद जताई।
बांग्लादेश में वर्ष 2024 के छात्र नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। इसी घटनाक्रम के संदर्भ में नेहा बोरा के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, नेहा बोरा के संबोधन में भारत में हिंसा भड़काने या सरकार को बलपूर्वक हटाने की प्रत्यक्ष अपील की पुष्टि नहीं हुई है। उनका संदेश मुख्य रूप से लोकतंत्र, मतदान के अधिकार और छात्र आंदोलनों के बीच एकजुटता पर केंद्रित था। भारत में नेहा बोरा हाल के दिनों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं।
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