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Uttarakhand देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी ने रविवार को पर्यटकों का स्वागत किया। पहले दिन वन विभाग के कर्मचारियों ने मुख्य द्वार पर आगंतुकों का स्वागत किया, जहां जून में अब तक 62 पर्यटकों ने पंजीकरण कराया था। इस घाटी में हिमालयी फूलों की 300 से अधिक प्रजातियां हैं।
फूलों की घाटी, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, 500 से अधिक पौधों की प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। यह हर साल जून से अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। यह घाटी गढ़वाल हिमालय में नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के बगल में स्थित है, और अपनी शांत, सुरम्य सुंदरता के लिए जानी जाती है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को घोषणा की कि उत्तराखंड सरकार राज्य में वैज्ञानिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल दवा निपटान की दिशा में एक कदम उठाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को राज्य में लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह निर्णय महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उत्तराखंड को देशभर में 'हरित स्वास्थ्य व्यवस्था' का आदर्श राज्य बनाने की एक परिवर्तनकारी पहल है। स्वास्थ्य सचिव एवं एफडीए के आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि अब तक एक्सपायर हो चुकी और अप्रयुक्त दवाओं के निपटान के लिए स्पष्ट और सुसंगत व्यवस्था का अभाव रहा है।
कुमार ने कहा, 'उत्तराखंड जैसे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील राज्य में यह चुनौती और गंभीर हो जाती है। अब हम एक सुनियोजित व्यवस्था के तहत इसे नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।' उन्होंने बताया कि इन दिशा-निर्देशों में दवाओं के उत्पादन से लेकर उपभोग और फिर उचित निपटान तक के जीवन चक्र के हर चरण को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया तय की गई है। कुमार ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 'स्वस्थ नागरिक, स्वच्छ उत्तराखंड' मिशन के तहत यह पहल राज्य को हरित और सतत स्वास्थ्य सेवा मॉडल की ओर ले जाएगी। इस निर्णय से राज्य को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय उत्तरदायित्व एवं स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की सम्भावनाएं भी प्रबल हो गई हैं। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों, नीति निर्धारकों, व्यापारिक संगठनों एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही इस मिशन को सफल बनाया जा सकता है। इस दिशा में उत्तराखण्ड एक मिसाल बनने की ओर अग्रसर है।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार उत्तराखण्ड के शहरी, अर्धशहरी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से “ड्रग टेक-बैक साइट्स” स्थापित की जाएंगी। यहां आम नागरिक अपने घरों में पड़ी अनुपयोगी, एक्सपायर या खराब हो चुकी दवाइयां जमा कर सकेंगे। इन केन्द्रों से दवाओं को वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित कर विशेष रूप से स्वीकृत प्रसंस्करण इकाइयों में उनका निपटान किया जाएगा। (एएनआई)
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