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कोयला खदानों को देख विकास की एक और तस्वीर से रूबरू हुआ उत्तराखंड का मीडिया दल

SHIDDHANT
15 Sept 2026 11:40 PM IST
कोयला खदानों को देख विकास की एक और तस्वीर से रूबरू हुआ उत्तराखंड का मीडिया दल
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Korba. कोरबा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर के दूसरे दिन उत्तराखंड के 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा ओपनकास्ट कोयला खदान का भ्रमण किया। पत्रकारों ने यहां कोयला उत्पादन, आधुनिक खनन तकनीक, श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं को करीब से समझा।
मीडिया दल ने खदान क्षेत्र में कोयला निकालने से लेकर ओवरबर्डन हटाने, कोयले की हैंडलिंग और परिवहन तक की प्रक्रिया का जायजा लिया। अधिकारियों ने उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनरी, शॉवेल-डंपर संयोजन, सरफेस माइनर और रिपर तकनीक के उपयोग की जानकारी दी। इसके साथ खदान की निगरानी और संचालन में इस्तेमाल हो रही डिजिटल तकनीकों के बारे में भी बताया गया। एसईसीएल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय मिश्रा ने कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतों और विकास में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी उत्पादन बढ़ाने के साथ श्रमिक सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।
महाप्रबंधक ऑपरेशंस धीरज चौधरी ने बताया कि गेवरा दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी और एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है। उनके अनुसार वर्ष 2023-24 में यहां करीब 59.1 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ। खदान से देश के सात राज्यों को कोयले की आपूर्ति की जाती है और भारत के कुल कोयला उत्पादन में इसका योगदान करीब छह प्रतिशत बताया गया। अधिकारियों के मुताबिक एसईसीएल आने वाले समय में उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने खदान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का भी अध्ययन किया। इनमें वनीकरण, मियावाकी तकनीक से पौधरोपण, धूल नियंत्रण, खदान के पानी का प्रबंधन और भूमि पुनर्वास जैसी पहल शामिल हैं। मियावाकी तकनीक के तहत करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार पौधे लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन पौधों का सर्वाइवल रेट करीब 70 प्रतिशत है। कम जमीन पर सघन वन विकसित करने वाली इस तकनीक को उत्तराखंड जैसे सीमित भू-भाग वाले क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है। इससे हरित क्षेत्र विकसित करने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण में भी मदद मिल सकती है।
पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक एवं टूर संचालन अधिकारी संजीव सुंद्रियाल ने कहा कि विकास, ऊर्जा, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े इस मॉडल का अध्ययन उत्तराखंड के लिए भी लाभकारी हो सकता है। उन्होंने मीडिया एक्सपोजर टूर को पत्रकारों को केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। मीडिया प्रतिनिधिमंडल बुधवार को एनटीपीसी और बाल्को का दौरा कर ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों और तकनीकी प्रबंधन की जानकारी लेगा।
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