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US-Israel-Iran War, PM मोदी ने की बड़ी बैठक

jantaserishta.com
22 March 2026 5:17 PM IST
US-Israel-Iran War, PM मोदी ने की बड़ी बैठक
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आधिकारिक आवास '7 लोक कल्याण मार्ग' पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं. इस बैठक में सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद हैं, जिसमें मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों से संबंधित स्थिति की समीक्षा की जा रही है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है.

इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केमिकल एंड फर्टिलाइजर और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिहं पुरी, श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया समेत अन्य वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे.

ईरान का बयान

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब एक खतरनाक मोड़ पर है. दुनिया के सबसे जरूरी तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान के रुख अचानक बदलते दिख रहे हैं. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे के भीतर यह समुद्री रास्ता नहीं खुला, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों को निशाना बनाएगा. इस धमकी के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें थोड़ी नरमी और कुछ शर्तें साफ झलक रही हैं.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान का कहना है कि वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं रखना चाहता. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन में ईरान के प्रतिनिधि अली मौसावी ने रविवार को कहा कि 'दुश्मन देशों' के जहाजों को छोड़कर बाकी सबके लिए यह रास्ता खुला है. यहां दुश्मन से उनका सीधा मतलब अमेरिका और इजरायल से है. ईरान ने कहा है कि अगर कोई जहाज उनके सुरक्षा नियमों का पालन करता है और उसका ताल्लुक उनके दुश्मनों से नहीं है, तो उसे गुजरने में कोई दिक्कत नहीं होगी.
गौर करने वाली बात यह है कि यह सारा बवाल बीते 28 फरवरी से शुरू हुआ था. उस समय ईरान ने इस रास्ते को बंद करने का एलान करते हुए साफ कहा था कि वह अमेरिका और इजरायल तक तेल की एक बूंद भी नहीं पहुंचने देगा. चूंकि दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए ईरान के इस कदम ने ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मचा दिया था. सबको डर था कि अगर यह रास्ता बंद रहा, तो पूरी दुनिया में ऊर्जा का भारी संकट खड़ा हो जाएगा और तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी.
ईरान का तर्क है कि खाड़ी में हालात बिगड़ने की असली जड़ अमेरिका और इजरायल के हमले हैं. उनका कहना है कि वे तेहरान खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा और नाविकों की हिफाजत के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर काम करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए आपसी भरोसा जरूरी है. दूसरी तरफ, अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक नौसैनिक गठबंधन बनाने की कोशिश की थी, हालांकि नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य एक्शन से हाथ खींच लिए थे. अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के इस शर्तों वाले ऑफर को स्वीकार करता है या 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने के बाद कोई बड़ा एक्शन लेता है. फिलहाल सबकी नजरें इसी बात पर हैं कि यह विवाद बातचीत से सुलझता है या बात जंग तक पहुंचती है.
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