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जंतर-मंतर पर यूनाइटेड हिंदू फ्रंट संगठन का जोरदार प्रदर्शन

Shantanu Roy
1 Aug 2026 9:38 PM IST
जंतर-मंतर पर यूनाइटेड हिंदू फ्रंट संगठन का जोरदार प्रदर्शन
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हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग
New Delhi. नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और राष्ट्रवादी शिवसेना की ओर से विरोध-प्रदर्शन किया गया। संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जय भगवान गोयल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक इस प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों व मीडिया कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामलों को लेकर अपनी मांगें रखीं। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी नागरिकों को है, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली घटनाओं को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
संगठन ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन के दौरान संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ विरोध प्रदर्शनों में असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैलाने की कोशिश की और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाओं से आम लोगों को परेशानी होती है और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों का मनोबल प्रभावित होता है। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि हिंसा से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाए।
संगठन ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई कथित हिंसा का भी मुद्दा उठाया। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और राष्ट्रवादी शिवसेना ने इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) सहित अन्य कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। जय भगवान गोयल ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर हुए कुछ विरोध प्रदर्शनों का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध स्थलों का उपयोग अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया। हालांकि, उनके इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
गोयल ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शन हिंसक रूप लेने की कोशिश में बदल गए, जिसमें पुलिसकर्मियों और मीडिया से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को चुनौती देने वाली ऐसी गतिविधियों पर सख्ती जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर देश विरोधी और हिंदू विरोधी नारे लगाए गए। संगठन ने इस तरह की गतिविधियों की जांच की मांग की। साथ ही सरकार से अपील की कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर नजर रखी जाए।
जय भगवान गोयल ने आरोप लगाया कि संसद मार्च से जुड़े विरोध प्रदर्शन में बाहरी ताकतों की भूमिका रही। उन्होंने कुछ विदेशी संगठनों और व्यक्तियों पर भी आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों को लेकर कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद थे, जिनका उद्देश्य केवल माहौल खराब करना था। गोयल ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को उकसाने की कोशिश की ताकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा किया जा सके।
यूनाइटेड हिंदू फ्रंट ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग करने की बात कही। संगठन ने मांग की कि हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और सुरक्षा बलों पर हमले के मामलों में कठोर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश में कानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति या संगठन को हिंसा फैलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध की अनुमति है, लेकिन हिंसक गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है।
वहीं, दिल्ली में इस तरह के प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहता है। जंतर-मंतर राजधानी का प्रमुख प्रदर्शन स्थल है, जहां समय-समय पर विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के इस प्रदर्शन के बाद एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों में हिंसा, कानून व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। संगठन ने जहां सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है, वहीं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
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