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परिजन सदमें में
Raisen. रायसेन। रायसेन जिले के सतलापुर क्षेत्र में एक बार फिर दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। मौजमपुरा इलाके के पास स्थित अवैध उत्खनन से बनी गहरी खदान में शुक्रवार शाम नहाने गए दो किशोरों की डूबने से मौत हो गई। यह वही खतरनाक खदान है, जहां दिसंबर 2023 में चार किशोरों की जान जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा इंतजाम अब तक नहीं किए गए। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और खनन गतिविधियों पर फिर सवाल उठने लगे हैं।
मृतकों की पहचान वार्ड क्रमांक-19 निवासी 14 वर्षीय जय नागले और 15 वर्षीय अमन वाल्मीकि के रूप में हुई है। अमन मूल रूप से सागर जिले के ग्राम घोरठ का रहने वाला था और वर्तमान में राहुल नगर में रह रहा था। दोनों किशोर शुक्रवार शाम मोटरसाइकिल से मौजमपुरा स्थित खदान पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, दोनों नहाने के लिए खदान के पानी में उतरे थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटे। देर शाम तक जब वे घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की।
खोजबीन के दौरान खदान के किनारे उनकी मोटरसाइकिल और कपड़े मिले, जिससे अनहोनी की आशंका गहरा गई। इसके बाद परिजनों ने पुलिस और नगर पालिका को सूचना दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और नगर पालिका के गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। देर रात तक चले अभियान में दोनों किशोरों के शव बरामद किए गए। अमन का शव करीब 12:30 बजे और जय का शव लगभग 2 बजे पानी से बाहर निकाला गया।
जैसे ही दोनों शव बाहर आए, मौके पर मौजूद परिजनों और स्थानीय लोगों में कोहराम मच गया। बताया जा रहा है कि दोनों किशोर अपने-अपने परिवार के इकलौते बेटे थे, जिससे परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह खदान लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें 50 फीट से अधिक गहराई तक अवैध उत्खनन किया गया था। सड़क निर्माण कार्यों के लिए यहां से बड़े पैमाने पर मिट्टी, मुरम और पत्थर निकाले गए थे। उत्खनन के बाद गहरे गड्ढों को खुले में छोड़ दिया गया, जिनमें बारिश का पानी भरने से यह स्थान खतरनाक जलाशय में बदल गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं और न ही किसी प्रकार की फेंसिंग या चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जबकि 2023 में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने सुधार के दावे किए थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस अवैध उत्खनन में प्रभावशाली लोगों और निर्माण एजेंसियों की मिलीभगत रही है। इस मामले को लेकर पहले भी शिकायतें और पुलिस कार्रवाई हो चुकी हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके अलावा खदान क्षेत्र की जमीन को लेकर भी विवाद बना हुआ है।
वन विभाग इसे वन भूमि बताता है, जबकि एकेवीएन इस पर अपना दावा करता है। वहीं कुछ निजी पक्षों के कब्जे की भी बात सामने आती रही है, जिससे मामला और जटिल हो गया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि लंबे समय से यहां अवैध गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें कथित तौर पर मछली पालन जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं, लेकिन किसी भी विभाग ने स्थायी कार्रवाई नहीं की। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक का माहौल है। लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस खदान को तत्काल बंद किया जाए, सुरक्षा व्यवस्था की जाए और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो।
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