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OMG! फर्जी अधिकारी समेत दो गिरफ्तार, कैसे हुआ पर्दाफाश?
jantaserishta.com
18 July 2025 4:01 PM IST

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फर्जी IAS पकड़ाया.
इटावा: यह कहानी है दो ऐसे शातिर युवकों की, जो फर्जी अफसर बनकर ब्ला ब्ला एप से बुकिंग कर कार में बैठाने के बाद लोगों को लूट रहे थे. इसके लिए उन्होंने बकायदा एक स्कॉर्पियो कार ले रखी थी, जिस पर 'भारत सरकार' और 'मजिस्ट्रेट' लिखा था. इतना ही नहीं इनके साथ IAS का फर्जी परिचय पत्र और कार पर स्टीकर भी मिला.उनकी इस साजिश ने पुलिस तक को चकरा दिया. मगर इस बार किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और अब दोनों सलाखों के पीछे हैं.
ये वारदात इटावा जिले के सैफई थाना क्षेत्र की है, जहां पुलिस ने दो फर्जी अफसरों को गिरफ्तार कर एक बड़ी साजिश का भंडाफोड़ किया है. ये दोनों आरोपी अमर पांडे और रामाधीन. मूल रूप से बलरामपुर के रहने वाले हैं, लेकिन नकली पहचान के साथ पूरे प्रदेश में सफर कर रहे थे.
सब कुछ शुरू हुआ लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से, जहां स्कॉर्पियो गाड़ी में भारत सरकार और मजिस्ट्रेट लिखा देख एक आम यात्री को विश्वास हो गया कि यह कोई सरकारी गाड़ी है. उसने ब्ला-ब्ला ऐप के माध्यम से फिरोजाबाद तक की यात्रा बुक की. वह क्या जानता था कि वह एक सुनियोजित अपराध का हिस्सा बनने जा रहा है. गाड़ी लखनऊ से चली और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जैसे ही इटावा जिले के सैफई क्षेत्र में पहुंची, ड्रामा शुरू हो गया. गाड़ी में बैठे नकली अफसरों ने पहले तो यात्री को धमकाया, फिर उस पर तमंचा तानकर उसका मोबाइल और रुपये छीन लिए. इसके बाद उसे चलती गाड़ी से धक्का देकर सड़क किनारे फेंक दिया.
उस समय हाईवे पर गश्त कर रही पुलिस की टीम मौके पर मौजूद थी. घायल और सदमे में डूबे यात्री ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर पुलिस को घटना की जानकारी दी. तत्काल हरकत में आई पुलिस ने गाड़ी का पीछा किया. जब शातिर आरोपी पुलिस से बच नहीं पाए, तो गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गए.
कुछ ही घंटों बाद, वही स्कॉर्पियो गाड़ी को वापस लेने एक युवक पुलिस चौकी पर पहुंचा. उसने अपना नाम अमर पांडे बताया और खुद को शामली जिले के ऊन तहसील का SDM बताया. उसने बाकायदा एक नियुक्ति पत्र भी पुलिस को दिखाया, जो पहली नजर में असली जैसा लग रहा था. मगर पुलिस को उसकी बातों में झोल नजर आया. पुलिस ने तत्काल लूट के शिकार यात्री को बुलवाया और उसकी पहचान करवाई. पीड़ित ने तुरंत अमर पांडे और उसके साथी को पहचान लिया. इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गई.
गाड़ी की तलाशी लेने पर पुलिस को दो अवैध तमंचे, जिंदा कारतूस, और फर्जी सरकारी दस्तावेज मिले. मजिस्ट्रेट की प्लेट लगी स्कॉर्पियो भी फर्जी तरीके से इस्तेमाल की जा रही थी. पुलिस को शक है कि ये गिरोह इसी तरीके से कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है. इन पर केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है.
इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने इस मामले में खुलासा करते हुए कहा यह लोग बहुत ही शातिर ढंग से योजना बनाकर काम कर रहे थे. आम जनता को भ्रम में डालने के लिए गाड़ी पर सरकारी प्लेट, फर्जी आईडी और सरकारी अफसर बनने का नाटक किया जाता था. ब्ला-ब्ला जैसे ट्रैवल एप्स का गलत इस्तेमाल करके लोगों को बीच रास्ते में लूटा जाता था. उन्होंने लोगों से अपील की कि यात्रा के दौरान विशेष सतर्कता बरतें और यदि कोई गाड़ी या व्यक्ति संदिग्ध लगे तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दें.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन आरोपियों ने इस तरह की और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है. साथ ही, इनका नेटवर्क कहां तक फैला है, क्या कोई और भी इसमें शामिल है, और ये फर्जी नियुक्ति पत्र किस माध्यम से बनवाए गए.
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