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सांकेतिक तस्वीर (AI)
Delhi दिल्ली: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए अंतर्राष्ट्रीय टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने नेशनल इमरजेंसी एक्ट का इस्तेमाल करके दुनिया के देशों पर भारी टैरिफ लगाकर अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति को व्यापारिक नीतियों में टैरिफ लगाने का अधिकार सीमित है और इसे संविधान और संसद द्वारा तय कानूनों के दायरे में रहकर ही लागू किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप का यह कदम संवैधानिक ढांचे के खिलाफ था और इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन हुआ।
इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन और ट्रेड पॉलिसी पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है। इससे पहले ट्रंप ने कई देशों पर व्यापार घाटे और घरेलू उद्योगों की रक्षा के नाम पर टैरिफ लगाए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे संविधान के खिलाफ माना।
नतीजतन, अमेरिका की कंपनियों और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि टैरिफ के कारण आयातित सामान महंगा हो गया था। इस फैसले के बाद अमेरिकी कांग्रेस और प्रशासन को व्यापारिक नीतियों पर नए सिरे से विचार करना पड़ेगा।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत और अमेरिका की आंतरिक राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच अधिकारों के संतुलन पर बहस तेज होगी। इस घटना ने यह भी दिखाया कि अमेरिका में राष्ट्रपति के शक्तियों पर न्यायपालिका की नजर बनी रहती है और किसी भी संवैधानिक उल्लंघन को अदालत रद्द कर सकती है।
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