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Delhi दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “मुझसे उतने खुश नहीं हैं” क्योंकि अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ लगाए हैं। ट्रंप ने यह टिप्पणी हाउस GOP मेंबर रिट्रीट में की, जो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के रिपब्लिकन सदस्यों की वार्षिक बैठक है। ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी मुझसे मिलने आए थे और हमारे बीच अच्छे संबंध हैं। लेकिन उन्हें अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क की वजह से ज्यादा खुशी नहीं है। हालांकि, जैसा कि आप जानते हैं, अब भारत ने रूस से तेल के व्यापार को काफी हद तक कम कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने उन्हें यह भी बताया कि वह अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए पिछले पांच साल से इंतजार कर रहा था। ट्रंप ने कहा, “हम इसे बदल रहे हैं। भारत ने कुल 68 अपाचे हेलीकॉप्टर का ऑर्डर दिया है।”
टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी
ट्रंप ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि अगर नई दिल्ली रूस से तेल के इंपोर्ट पर अमेरिका की चिंताओं को दूर नहीं करती है, तो वाशिंगटन भारतीय सामान पर और अधिक टैरिफ लगा सकता है। उन्होंने कहा, “वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। अमेरिका अपनी ट्रेड पॉलिसी के तहत भारत के साथ बढ़ते ट्रेड डेफिसिट को कम करने का प्रयास कर रहा है। पिछले साल भारत के रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल खरीदने के हवाले से अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय इंपोर्ट पर टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया था। इसके अलावा, भारत और अमेरिका संभावित ट्रेड एग्रीमेंट पर भी बातचीत कर रहे हैं।
भारत ने नीति पर रखा जोर
भारत ने रूस से तेल इंपोर्ट करने के अपने फैसले का लगातार बचाव किया है। भारत का कहना है कि यह निर्णय देश के हित और नागरिकों के लिए सस्ता ईंधन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर आधारित है। भारत ने दोहराया है कि वह अपनी रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखते हुए सभी ग्लोबल पार्टनर्स के साथ बातचीत जारी रखेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बनकर उभरा। इस कदम की अमेरिका लगातार आलोचना करता रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका का ग्लोबल ऊर्जा सैक्टर में दबाव और ट्रेड पॉलिसी प्रभावित होती है। ट्रंप की टिप्पणी से एक बार फिर अमेरिका-भारत व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। दोनों देशों के बीच तेल और हवाई रक्षा उपकरण जैसे अहम मसलों को लेकर बातचीत लगातार चल रही है, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश हो रही है।
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