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ट्रंप ने रूस को दी कड़ी चेतावनी- “युद्ध नहीं रोका तो होंगे गंभीर परिणाम”
Shantanu Roy
14 Aug 2025 12:38 AM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अगर उसने यूक्रेन में जारी युद्ध को नहीं रोका, तो उसे “बहुत गंभीर” नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप का यह बयान 15 अगस्त को अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले आया है।
पुतिन को अल्टीमेटम: युद्धविराम नहीं तो प्रतिबंध
बुधवार को केनेडी सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, ट्रंप से पूछा गया कि अगर पुतिन शुक्रवार की बैठक के बाद युद्ध रोकने के लिए सहमत नहीं होते, तो क्या रूस पर कोई कार्रवाई होगी? इस पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा — “हां, रूस को कड़े अंजाम भुगतने होंगे।” ट्रंप ने संकेत दिया कि इन संभावित परिणामों में कड़े आर्थिक प्रतिबंध और उच्च टैरिफ शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे विस्तार से बताने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन नतीजे बेहद गंभीर होंगे।”
बैठक से पहले कूटनीतिक हलचल तेज
डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की 15 अगस्त को अलास्का में आमने-सामने मुलाकात होने वाली है। यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए एक अहम प्रयास मानी जा रही है। ट्रंप ने कहा कि वह इस बैठक के बाद जल्द ही दूसरी बैठक का प्रस्ताव देंगे, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा, “अगर पहली बैठक सफल रही, तो मैं तुरंत दूसरी बैठक करूंगा। अगर वे चाहें तो राष्ट्रपति पुतिन, राष्ट्रपति जेलेंस्की और मैं एक ही टेबल पर बैठ सकते हैं।”
"Will Russia face any consequences if Vladimir Putin does not agree to stop the war after your meeting on Friday?"@POTUS: "Yes, they will." pic.twitter.com/lLfbR0iHxj
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) August 13, 2025
यूरोपीय नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक
ट्रंप के इस बयान से पहले उन्होंने यूरोपीय नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक की। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहे हैं। मैक्रॉन ने जोर दिया कि युद्धविराम न केवल मानवीय दृष्टिकोण से आवश्यक है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। इसी बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि पुतिन केवल “ब्लफ” कर रहे हैं और युद्धविराम की आड़ में दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह पूरे यूक्रेन पर कब्जा करने में सक्षम है, जबकि हकीकत में वह कई मोर्चों पर कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, “पुतिन की रणनीति डर पैदा करना और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को कमजोर करना है, लेकिन हम झुकेंगे नहीं।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। नाटो के कई सदस्य देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के रुख का समर्थन किया है। ब्रिटेन ने भी चेतावनी दी है कि अगर रूस ने युद्ध नहीं रोका, तो उस पर और सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे। दूसरी ओर, रूस के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप की टिप्पणियों को “दबाव की राजनीति” करार दिया है। रूसी प्रवक्ता ने कहा, “रूस किसी भी धमकी से पीछे नहीं हटेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और यूरोप ने मिलकर रूस पर नए प्रतिबंध लगाए, तो इसका असर रूस की अर्थव्यवस्था पर गहरा होगा। खासकर ऊर्जा क्षेत्र में निर्यात पर प्रतिबंध से रूसी राजस्व में भारी गिरावट आ सकती है। ट्रंप प्रशासन पहले ही संकेत दे चुका है कि रूसी बैंकिंग सेक्टर, रक्षा उद्योग और टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट को निशाना बनाया जा सकता है।
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