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Agartala. अगरतला। त्रिपुरा में नई तकनीकों और अभिनव इंजीनियरिंग समाधानों के इस्तेमाल को लेकर आईआईटी खड़गपुर के साथ सहयोग की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन यानी एमओयू तकनीक आधारित होगा। संस्थान की ओर से विकसित नवाचारों और इस्तेमाल की जा रही तकनीकों को समझने के बाद राज्य में उनकी उपयोगिता पर निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस सहयोग को आगे बढ़ाने से पहले संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। सरकार यह देखेगी कि आईआईटी खड़गपुर किन तकनीकों पर काम कर रहा है और उसने कौन से नए नवाचार किए हैं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर तय किया जाएगा कि त्रिपुरा में किन तकनीकों और नए विचारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
माणिक साहा ने कहा कि जिस एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, उसका आधार प्रौद्योगिकी होगी। उन्होंने बताया कि संस्थान की तकनीकों, नए प्रयोगों और अभिनव विचारों को लेकर पूरे विषय पर विचार किया जाएगा। इसके बाद राज्य के लिए उपयोगी विकल्पों को अपनाने की दिशा तय होगी। उन्होंने इस प्रक्रिया में विस्तृत बातचीत की बात दोहराई। साहा के बयान के मुताबिक, प्रस्तावित सहयोग में तकनीक के चयन से पहले उसे समझने पर जोर रहेगा। संस्थान में विकसित किसी नए समाधान को त्रिपुरा में इस्तेमाल करने का निर्णय उसकी उपयोगिता देखने के बाद लिया जाएगा। इस तरह बातचीत का मुख्य विषय उपलब्ध तकनीकों और राज्य में उनके संभावित प्रयोग के बीच संबंध तलाशना होगा।
मुख्यमंत्री ने नए विचारों और नवाचारों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे विचारों पर चर्चा होगी, जिनका इस्तेमाल त्रिपुरा में किया जा सके। उनके वक्तव्य में किसी एक तकनीक या इंजीनियरिंग परियोजना का नाम नहीं बताया गया। फिलहाल सहयोग की दिशा तकनीक और नवाचार आधारित रखने की बात सामने आई है। प्रस्तावित एमओयू को लेकर साहा की टिप्पणी से यह भी स्पष्ट है कि तकनीकों के इस्तेमाल का अंतिम निर्णय अभी आगे की चर्चा पर निर्भर है। उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर होने की बात भविष्य के संदर्भ में कही। इसलिए इसे समझौता संपन्न होने या किसी विशेष तकनीक का क्रियान्वयन शुरू होने की घोषणा नहीं माना जा सकता।
आगामी चर्चा में संस्थान की नई तकनीकों और अभिनव समाधानों के बारे में जानकारी पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी आधार पर सरकार पूरे विषय को देखेगी और त्रिपुरा में इनके उपयोग को लेकर निर्णय करेगी। उनका जोर ऐसे विकल्पों को समझने पर रहा, जिन्हें राज्य में इस्तेमाल करने की संभावना हो। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपने बयान में एमओयू पर हस्ताक्षर की तारीख, सहयोग की अवधि या किसी निर्धारित बजट की जानकारी नहीं दी। किन क्षेत्रों में तकनीक का उपयोग होगा और शुरुआती चरण में कौन से काम लिए जाएंगे, इसका विवरण भी साझा नहीं किया गया है।
साहा ने कहा कि इन विषयों पर विस्तार से बातचीत की जाएगी। आईआईटी खड़गपुर की तकनीकी गतिविधियों और नए प्रयोगों को समझने के बाद ही सहयोग का स्वरूप तथा राज्य में उनके इस्तेमाल की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।
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