भारत
पेंटागन के शीर्ष अधिकारी का भारत दौरा हुआ खत्म, शांति के जरिए मजबूती के एजेंडे को आगे बढ़ाने पर रहा फोकस
jantaserishta.com
27 March 2026 9:46 AM IST

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वॉशिंगटन: अमेरिका के नीति मामलों के उप रक्षा सचिव एल्ब्रिज कोल्बी भारत-अमेरिका के अहम संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद करने के लिए नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करने भारत दौरे पर पहुंचे थे। पेंटागन के शीर्ष अधिकारी ने इस दौरान 2026 नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी और प्रेसिडेंट के पीस थ्रू स्ट्रेंथ एजेंडा के खास हिस्सों को आगे बढ़ाने के लिए सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की।
पेंटागन की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, भारत में रहते हुए उप रक्षा सचिव कोल्बी ने विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मुलाकात की। उन्होंने भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के साथ अमेरिका-भारत रक्षा नीति समूह की मीटिंग की सहअध्यक्षता भी की। इन चर्चाओं ने अमेरिका-भारत मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाया, जिस पर सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगसेथ ने अक्टूबर 2025 में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हस्ताक्षर किए थे।
फ्रेमवर्क में अमेरिका और भारत में ऑपरेशनल समन्वय, जानकारी साझा करना, क्षेत्रीय और ग्लोबल सहयोग और रक्षा उद्योग, विज्ञान और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने की बात कही गई। इसके अलावा, उन्होंने भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत, राजदूत सर्जियो गोर के साथ सलाह-मशविरा भी किया।
कोल्बी ने नई दिल्ली में अनंता सेंटर में भी भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के रक्षा और रणनीतिक सहयोग को निर्देशित करने में मदद के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया।
अमेरिका के नीति मामलों के उप रक्षा सचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका भारत को बहुत सम्मान की नजर से देखता है। इस देश की एक गौरवशाली रणनीतिक परंपरा है, और नई दिल्ली के फैसले इंडो-पैसिफिक के भविष्य को गहराई से प्रभावित करेंगे।
अनंत सेंटर में एक विशेष सत्र के दौरान एल्ब्रिज कोल्बी ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका भारत को गहरे सम्मान से देखता है। एक ऐसे गणराज्य के रूप में जो महाद्वीपीय स्तर का है, एक ऐसे राष्ट्र के रूप में जिसकी एक गौरवपूर्ण रणनीतिक परंपरा है, और एक ऐसे देश के रूप में जिसके निर्णय इंडो-पैसिफिक और व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के भविष्य को गहराई से आकार देंगे। हमारे दोनों देशों के इतिहास, भूगोल और दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण अंतर हैं। फिर भी हम एक मौलिक बात साझा करते हैं, यह विश्वास कि एशिया का भविष्य संप्रभु राष्ट्रों की ओर से निर्धारित होना चाहिए, जो अपने स्वयं के रास्ते तय करने में सक्षम हों।"
उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को केवल एक प्रमुख साझेदार के रूप में नहीं बल्कि एशिया में दीर्घकालिक अनुकूल शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए एक अनिवार्य साझेदार के रूप में देखता है। कोल्बी ने कहा, "भारत का महत्व केवल उसके आकार और आर्थिक क्षमता तक सीमित नहीं है बल्कि उसके भू-स्थान और रणनीतिक स्थिति से भी जुड़ा है। आपका देश हिंद महासागर के किनारे स्थित है, जो इंडो-पैसिफिक का संपर्क सूत्र है। भारत में रणनीतिक स्वायत्तता की एक लंबी परंपरा है और उसकी क्षमता लगातार बढ़ रही है, जिससे वह अपनी सीमाओं से बाहर भी घटनाओं को प्रभावित कर सकता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा गणराज्य है। इसकी सफलता का प्रतीकात्मक और राजनीतिक महत्व बहुत गहरा है। इसके पास मजबूत, आत्मनिर्भर और सक्षम सैन्य बल हैं, जो महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियां उठाने के लिए इच्छुक और सक्षम हैं।"
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