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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भाजपा नेता दिलीप घोष ने मंगलवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चलनी चाहिए।
दिलीप घोष ने सबसे पहले माध्यमिक एडमिट कार्ड को उम्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने के मुद्दे पर बात की। भाजपा नेता दिलीप घोष ने बताया कि पहले इस दस्तावेज को मान्य माना गया था, फिर इसकी वैधता वापस ले ली गई और अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इसे दोबारा मान्य कर दिया गया है। इस बार-बार बदलाव से मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बन रही है, क्योंकि उन्हें बार-बार वही दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, "लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा पहले भी हो चुका है। मुझे जानकारी है कि एक ही बूथ से करीब 350 लोगों को नोटिस भेजा गया है, जबकि उसी बूथ पर भाजपा को लगभग 450 वोट मिलते हैं। इस तरह की स्थिति से आम लोगों में सवाल और शंकाएं पैदा हो रही हैं।"
एसआईआर को लेकर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के बयान पर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी चाहती है कि एसआईआर पूरी तरह साफ और पारदर्शी हो। हम चाहते हैं कि सिर्फ वही लोग वोटर लिस्ट में रहें जो सच में वोट देने के योग्य हैं। जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें सूची से अलग किया जाए, लेकिन आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि एसआईआर का काम सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन इसमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से व्यवधान डाला जा रहा है। उन्होंने अलग-अलग जगहों से आ रही उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई, जिनमें बीएलओ अधिकारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमलों की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा, "सिर्फ बीएलओ ही नहीं, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हमले हो रहे हैं। जो लोग शिकायत करने जाते हैं, उन पर भी हमला किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में चुनाव कैसे होगा?"
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव को साफ और निष्पक्ष बनाने के लिए चुनाव आयोग लगातार काम कर रहा है।
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