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कसा शिकंजा: ED ने चीनी जासूसी मामले में पत्रकार राजीव शर्मा की संपत्ति कुर्क की, स्पेशल सेल ने किया था गिरफ्तार

Admin1
15 Jan 2022 9:52 AM GMT
कसा शिकंजा: ED ने चीनी जासूसी मामले में पत्रकार राजीव शर्मा की संपत्ति कुर्क की, स्पेशल सेल ने किया था गिरफ्तार
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नई दिल्ली: चीन के लिए जासूसी के आरोपी दिल्ली के स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की मुश्किलें अभी कम होती नहीं दिख रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को बताया कि उसने पत्रकार की 48.21 लाख रुपये की आवासीय संपत्ति कुर्क की है। शर्मा पर कथित रूप से चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील जानकारी लीक करने और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच चल रही है।

ईडी ने एक बयान में कहा कि राजधानी दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की संपत्ति कुर्क करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत एक अस्थायी आदेश जारी किया गया है। पिछले साल जुलाई में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए शर्मा को पिछले सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में जमानत दे दी थी।
एजेंसी ने कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि शर्मा ने धन के बदले चीनी खुफिया अधिकारियों को गोपनीय और संवेदनशील जानकारी की उपलब्ध कराई थी, जिससे देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया था।
राजीव शर्मा को यह रकम महिपालपुर स्थित एक शेल कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही थी, जिसे एक नेपाली नागरिक शेर सिंह उर्फ ​​राज बोहरा और झांग चेंग उर्फ ​​सूरज, झांग लिक्सिया उर्फ ​​उषा और किंग शी जैसे चीनी नागरिक चला रहे थे। ईडी ने बयान में कहा कि यह चीनी कंपनी राजीव शर्मा जैसे व्यक्तियों को रकम प्रदान करने के लिए चीनी खुफिया एजेंसियों के लिए एक कड़ी के रूप में काम कर रही थी। उसने दावा किया कि रकम का भुगतान नकद जमा के साथ ही नकद भुगतान के माध्यम से किया जा रहा था।
ईडी ने आरोप लगाया कि शर्मा ने आपराधिक गतिविधियों में अपनी संलिप्तता को छिपाने के लिए अपने दोस्त के बैंक खाते का उपयोग करके पैसे भी प्राप्त किए।
एजेंसी का मामला 2020 में राजीव शर्मा के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दायर दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर आधारित है। ईडी ने पिछले साल इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की थी।
पत्रकार को 14 सितंबर, 2020 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया था। उन पर भारतीय सेना की तैनाती और देश की सीमा रणनीति के बारे में चीनी खुफिया अधिकारियों को जानकारी देने का आरोप लगाया गया था।
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