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'टाइगर स्टेट' ने सुरक्षा का दायरा बढ़ाया, 7000 हेक्टेयर भूमि 'संरक्षित वन' सूची में जोड़े

jantaserishta.com
8 April 2023 4:06 PM IST
टाइगर स्टेट ने सुरक्षा का दायरा बढ़ाया, 7000 हेक्टेयर भूमि संरक्षित वन सूची में जोड़े
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भोपाल (आईएएनएस)| कर्नाटक के मैसूर में 9 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'प्रोजेक्ट टाइगर' के 50 साल पूरे होने पर एक स्मारक सिक्के के साथ बाघों की गणना के नवीनतम आंकड़े जारी करेंगे। 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत 1973 में बाघों के प्राकृतिक आवास में उनकी समुचित आबादी सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
बाघ संरक्षण में भारत की सफलता को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और राज्यों के मुख्य वन संरक्षकों के साथ बाघों की गणना के नए आंकड़े जारी करेंगे। साथ ही वह 'अमृत काल' के लिए बाघ संरक्षण के नए लक्ष्य के बारे में भी बताएंगे।
बाघों की सर्वाधिक आबादी (अनुमानत: 700) और सबसे ज्यादा वन क्षेत्र के साथ 2018 से 'टाइगर स्टेट' का तमगा रखने वाले मध्य प्रदेश ने बाघों और ओवरऑल वन्य-जीवों के संरक्षण में अब तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक जे.एस. चौहान ने दावा किया कि पिछले 10-15 वर्षों में, राज्य में जंगली जानवरों के लिए संरक्षित क्षेत्रों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में बाघों की संख्या में वृद्धि उल्लेखनीय रही है। यह सभी हितधारकों के प्रयासों के कारण संभव हो सका है, विशेष रूप से प्रशासनिक पक्ष में। राज्य में कम से कम 7,000 हेक्टेयर वन भूमि को पुन: जंगल में शामिल किया गया यानी घने वन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले लगभग 200 गांवों की जमीन को अतिक्रमण मुक्त किया गया। इससे हमें मध्य प्रदेश में सभी बाघ अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में जंगली जानवरों के लिए सुरक्षा क्षेत्र, उनके भोजन की उपलब्धता और मुख्य क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली।
उन्होंने दावा किया कि नई तकनीक के क्रियान्वयन और वन क्षेत्रों को अलग-अलग हिस्सों में बांटने से बाघों का जीवन पुराने समय की तुलना में आसान हो गया है। बाघों और अन्य सभी जंगली जानवरों के लिए शांतिपूर्ण परि²श्य सुनिश्चित करने के लिए सड़कों और नहरों का निर्माण तथा कुछ अन्य कदम उठाए जा रहे हैं।
वन क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए, सिवनी-नागपुर राजमार्ग पर एक साउंड प्रूफ सिस्टम लागू किया गया है। रेडियो कॉलर सिस्टम के कार्यान्वयन से बाघों के निगरानी बेहतर हुई है। मध्य प्रदेश ने जंगली जानवरों का संरक्षण करने के लिए सबसे बड़ी टीम बनाई है जिसे स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स कहा जाता है।
राज्य में पिछले कुछ वर्षों से बाघों की मृत्यु दर सबसे अधिक देखी जा रही है और अधिकांश बाघों की अस्वाभाविक रूप से मृत्यु होने की सूचना मिली है। हालांकि, अधिकारियों ने राज्य में शिकारियों के संगठित रूप से काम करने की संभावना से इनकार किया है।
हमें यह समझना होगा कि लगभग 40-45 प्रतिशत बाघ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर घूमते हैं, जिसके कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़े हैं। मध्य प्रदेश में हर साल औसतन 35-40 बाघ मर रहे हैं, जबकि जन्म दर 100 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसका मतलब है कि संरक्षण तंत्र बेहतर हुआ है।
आधिकारिक दावे के अनुसार, वर्तमान में, मध्य प्रदेश में लगभग 700 बाघ हैं। यह संख्या देश में सबसे ज्यादा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भी राज्य 'टाइगर स्टेट' का खिताब बरकरार रखेगा।
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