गांव में तीन दिन का शोक, खामेनेई की मौत से मातम में डूबे रहवासी

कर्नाटक। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई है। इस हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्यों समेत उनके 40 से ज्यादा अधिकारी भी मारे गए। इसके बाद ईरान ने प्रतिक्रिया करते हुए पूरे मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला बोलना शुरू कर दिया। खामेनेई केवल ईरान के सर्वोच्च लीडर नहीं थे, बल्कि दुनियाभर के शिया समुदाय के लिए भी एक लीडर थे। उनके निधन के बाद भारत समेत कई देशों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी क्रम में कर्नाटक के गौरीबिदनूर तालुक, चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुर गांव में लोगों ने रविवार को खामेनेई की मृत्यु का शोक मनाया। ईरान के साथ गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिए प्रसिद्ध इस गांव में अनौपचारिक बंद रखा गया। ग्रामीणों ने उस नेता के निधन पर शोक जताया, जिसे वे अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानते थे।
एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई की मृत्यु की खबर की पुष्टि होते ही रविवार को पूरा गांव थम सा गया। 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता की मृत्यु की पुष्टि के बाद गांव ने स्वेच्छा से तीन दिन तक बंद रखने का निर्णय लिया। रविवार के दिन सुबह से ही दुकानें और सड़क किनारे की ठेलियाँ बंद रहीं। व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और गांव के विभिन्न चौराहों पर समूहों में लोग इकट्ठा हुए। कई लोग खामेनेई के चित्र लिए हुए थे, अनेक की आँखों में आँसू थे और वे धार्मिक नारे लगा रहे थे।
गौरतलब है कि अलीपुर को लंबे समय से मिनी ईरान कहा जाता है। क्योंकि यहां कि अधिकांश आबादी शिया मुस्लिम है और ईरान के साथ उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गहरे शैक्षणिक संबंध रहे हैं। बंद को पूरा करने के बाद दोपहर के समय अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में एक विरोध जुलूस निकाला गया, जिसमें लगभग पूरा गांव सड़कों पर उमड़ पड़ा। अनेक लोग शोक के प्रतीक के रूप में काले वस्त्र पहने हुए थे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस गांव का ईरान से संबंध केवल धर्म तक ही सीमित नहीं है। इस बस्ती का मूल नाम बेल्लिकुंटे था। बीजापुर आदिलशाहियों के काल में शिया मुस्लिमों का एक समूह यहाँ आकर बसा और इसका नाम अलीपुर रखा। आज भी अधिकांश निवासी व्यापार और शिक्षा के लिए ईरान तथा अरब देशों से जुड़े हुए हैं। खामेनेई से इस गांव का व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है, जब वे ईरान के राष्ट्रपति के रूप में गांव आए थे और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया था।





