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हिंदी को लेकर सोच बदलनी होगी: नवोदय स्कूलों पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की तमिलनाडु सरकार से टिप्पणी

SHIDDHANT
17 Sept 2026 8:55 PM IST
हिंदी को लेकर सोच बदलनी होगी: नवोदय स्कूलों पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की तमिलनाडु सरकार से टिप्पणी
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Delhi दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि उसे हिंदी को लेकर अपनी सोच बदलने की जरूरत है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि तमिलनाडु में हिंदी नहीं पढ़ाने की बात नहीं कही जा सकती। कोर्ट ने चेन्नई और दिल्ली को अलग-अलग देखने वाली सोच पर भी सवाल उठाया और दोनों के बीच दूरी बनाने से बचने की बात कही।
नवोदय स्कूलों को लेकर क्यों आमने-सामने हैं राज्य और केंद्र?
मामला तमिलनाडु के हर जिले में नवोदय विद्यालय शुरू करने से जुड़ा है। मद्रास हाईकोर्ट ने हर जिले में ऐसे स्कूल खोलने का आदेश दिया था। अब तमिलनाडु सरकार ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार की मदद से चलने वाले आवासीय स्कूल हैं। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते हैं और छात्रों के रहने की व्यवस्था भी होती है। इन स्कूलों को नवोदय विद्यालय समिति चलाती है, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करती है। तमिलनाडु सरकार की सबसे बड़ी आपत्ति इन स्कूलों की भाषा व्यवस्था को लेकर है। नवोदय विद्यालयों में तीन भाषा की व्यवस्था है, जिसमें हिंदी भी शामिल है। वहीं तमिलनाडु में दो भाषा की नीति लागू है। राज्य के स्कूलों में तमिल तथा अंग्रेजी पढ़ाई जाती है।
तमिलनाडु सरकार ने कहा- हमारी भाषा नीति अलग है
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि नवोदय विद्यालयों की व्यवस्था तमिलनाडु की मौजूदा शिक्षा और भाषा नीति से मेल नहीं खाती। उनका कहना था कि तीन भाषा वाली व्यवस्था में हिंदी को ज्यादा महत्व मिलने की संभावना है। इससे तमिल भाषा को नुकसान पहुंचने की आशंका भी राज्य सरकार ने जताई। राज्य ने यह भी दलील दी कि नवोदय विद्यालय सीधे केंद्र सरकार के स्कूल नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक सोसायटी चलाती है। सुनवाई में तमिलनाडु सरकार ने केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद का मुद्दा भी उठाया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग दोनों तरफ से होना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि आगे चलकर इन स्कूलों का खर्च राज्य सरकार को उठाना पड़ सकता है। राज्य ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्र से मिलने वाले भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र की योजना अपनाना झुकना नहीं
राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि केंद्र की किसी योजना को अपनाने का मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार केंद्र के सामने झुक रही है। उनके मुताबिक केंद्र और राज्य को साथ मिलकर काम करना चाहिए। बेंच ने यह भी कहा कि अगर राज्य में पहले से शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम हो रहा है और उसके साथ कोई नई व्यवस्था जुड़ती है, तो इससे शिक्षा का स्तर कम नहीं होगा। कोर्ट के मुताबिक नवोदय विद्यालय खुलने से छात्रों को पढ़ाई के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। कोर्ट ने हिंदी को लेकर भी राज्य की सोच पर सवाल उठाया। बेंच ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी।
केंद्र ने कहा- राज्य को स्कूल के लिए जमीन देनी होगी
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी स्कूल बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की होगी। बाकी व्यवस्था केंद्र सरकार की ओर से की जाएगी। केंद्र ने कहा कि राज्य को सबसे पहले हर जिले में ऐसी जमीन की पहचान करनी होगी, जहां नवोदय विद्यालय बनाया जा सके।
तमिलनाडु में भाषा का विवाद पुराना है
तमिलनाडु में हिंदी को लेकर विवाद नया नहीं है। राज्य में हिंदी को अनिवार्य किए जाने के प्रयासों के खिलाफ 1930 के दशक से आंदोलन होते रहे हैं। राज्य की स्कूल व्यवस्था में मुख्य रूप से तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती हैं। तमिलनाडु सरकार तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को शामिल करने का लगातार विरोध करती रही है। 29 जुलाई 2020 को लागू हुई नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 में छात्रों के लिए तीन भाषाएं सीखने की व्यवस्था रखी गई है। इसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि तीन भाषा की यह व्यवस्था उसकी मौजूदा दो भाषा नीति से अलग है। राज्य ने अपनी दो भाषा नीति पर कायम रहने की बात कही है।
मामला सिर्फ स्कूलों का नहीं, भाषा नीति का भी है
इस पूरे विवाद में एक तरफ नवोदय विद्यालयों की स्थापना और दूसरी तरफ तमिलनाडु की मौजूदा भाषा नीति का मुद्दा है। राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षा से जुड़े ऐसे फैसलों में उसके अधिकार और अपनी नीति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं, केंद्र की दलील है कि नवोदय विद्यालयों के लिए राज्य को जमीन उपलब्ध कराने की जरूरत है और बाकी व्यवस्था केंद्र की ओर से की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में इसी विवाद पर सुनवाई के दौरान हिंदी और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर भी टिप्पणी हुई।
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