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नई दिल्ली: कुछ समय पहले तक लड़कियों की शिक्षा एक बड़ा मसला हुआ करता था क्योंकि उनकी पढ़ाई को सेकेंडरी समझा जाता था. अगर डेटा और फैक्ट्स की बात करें तो लड़कियों की शिक्षा के मामले में कुछ सुधार तो आया है लेकिन अभी मंजिल दूर है. जहां पिछले सालों में स्कूलों में एडमिशन लेने वाली लड़कियों की संख्या में इजाफा हुआ है वहीं हाईस्कूल के बाद स्कूल छोड़ देने वाली लड़कियों की संख्या में गिरावट नहीं आयी है. अभी भी बहुत सी लड़कियां दसवीं के बाद स्कूल छोड़ देती हैं, जो चिंता का विषय है. ये विचार रखें शिक्षाविद दीप्ति मेहरोत्रा ने. दीप्ती लखनऊ में एक ऑनलाइन सेशन के अवसर पर बोल रही थी.
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