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Divorce Celebrate Video : जैसी विदाई वैसी वापसी भी, तलाक के बाद महिला का मायके में भव्य स्वागत

Nil dhankar
5 April 2026 3:35 PM IST
Divorce Celebrate Video : जैसी विदाई वैसी वापसी भी, तलाक के बाद महिला का मायके में भव्य स्वागत
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मेरठ। ढोल-नगाड़ों की आवाज... बेटी की तस्वीर वाली टी-शर्ट्स... फूलमालाएं और मिठाई... यह एक बेटी का स्वागत था- तलाक के बाद अपने घर लौट रही बेटी का. मेरठ के शास्त्री नगर इलाके से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज की उस सोच को आईना दिखाती है, जो आज भी बेटी के तलाक को ठीक नहीं मानती. रिटायर्ड जज पिता ने कहा कि बेटी सम्मान से रहे, वह भी बेटों की तरह है.

दरअसल, मेरठ में शास्त्री नगर के रहने वाले एक रिटायर्ड जज की बेटी प्रतीक्षा की शादी साल 2018 में शाहजहांपुर के रहने वाले मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ धूमधाम से हुई थी. शादी के बाद दोनों का एक बेटा भी हुआ. शुरूआती समय सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा. ससुराल में प्रताड़ना और आपसी मतभेदों ने इस रिश्ते को कमजोर कर दिया. हालात इतने बिगड़ गए कि मामला अदालत तक पहुंच गया. कई सालों तक चली कानूनी प्रक्रिया और संघर्ष के बाद आखिरकार 4 अप्रैल 2026 को अदालत ने दोनों के तलाक को मंजूरी दे दी. आमतौर पर ऐसे मौके पर परिवारों में मायूसी छा जाती है, लेकिन इस पिता ने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने अपनी बेटी को दुखी या असफल मानने की बजाय उसे सम्मान और आत्मसम्मान के साथ घर वापस लाने का फैसला किया.

जैसे ही प्रतीक्षा घर पहुंचीं, उनके स्वागत के लिए पहले से ही खास तैयारी की गई थी. ढोल-नगाड़ों की व्यवस्था की गई थी, परिवार और रिश्तेदार इकट्ठा थे, और जैसे ही बेटी कार से उतरी, फूलों की बारिश शुरू हो गई. लोग नाचते-गाते हुए उसका स्वागत कर रहे थे. पिता इस खुशी में शामिल थे. उन्होंने एक सफेद टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था- I Love My Bitiya. यह दृश्य भावुक करने वाला था, एक मजबूत संदेश भी दे रहा था. पिता ने साफ कहा कि बेटी कभी बोझ नहीं होती, बल्कि वह परिवार का अभिन्न हिस्सा होती है. उन्होंने कहा कि हम समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटी भी बेटे के बराबर है. अगर वह शादी में खुश नहीं है, तो उसे वहां जबरदस्ती नहीं रखा जाना चाहिए.

छह साल तक उसने बहुत कुछ सहा, लेकिन अब वह आजाद है और हम उसकी इस नई जिंदगी की शुरुआत का स्वागत कर रहे हैं. पिता का कहना था कि वह अपनी बेटी को दुखी नहीं देख सकते थे. जब वह मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट चुकी थी, तब उनका कर्तव्य था कि उसे सहारा दें और यह अहसास कराएं कि उसका घर हमेशा उसके साथ है. इस पूरे आयोजन के पीछे सिर्फ एक भावना थी- बेटी दुख में नहीं, सम्मान के साथ जिए. इस अनोखे स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. लोग पिता के फैसले की सराहना कर रहे हैं. कई लोगों ने लिखा कि अगर हर पिता ऐसा हो जाए, तो बेटियों को कभी डर नहीं लगेगा. प्रतीक्षा की जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ है. यह कहानी फिर से खड़े होने की है. और सबसे बढ़कर- यह कहानी एक पिता के उस प्यार की है, जो हर हाल में अपनी बेटी के साथ खड़ा रहता है.

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