महिला जिंदा हैं...फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया मुआवजा राशि, हुआ लापरवाही का खुलासा
जानकारी के मुताबिक अलीगढ़ के थाना बन्नादेवी क्षेत्र के मेलरोज बाईपास निवासी शकुंतला देवी व पुत्र हेमंत चौधरी ने बताया कि पिछले कई दिनों से उनके पास फोन आ रहे हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में शकुंतला देवी की मौत हो गई है. जबकि वह उन्हें बता रहे हैं कि शकुंतला देवी जिंदा है. वहीं जो लोग फोन कर रहे हैं वह कह रहे हैं कि आप लोग कागजी कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय से संपर्क करें. हेमंत का कहना है कि मुआवजा लेने से इनकार करने के बाद फोन पर बताया गया कि अगर आप साइन करते हैं तो फिर आपके खाते में 30,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएंगे. वहीं सरकार ने मुआवजा राशि 50 हजार तय किया है. यानी 20 हजार रुपये किसी और की जेब में जाएंगे. हेमंत का कहना है कि उन्होंने मां का इलाज एक निजी अस्पताल में कराया गया और कोरोना से उबरने के बाद वह ठीक हो गई हैं.
वहीं एक दूसरे मामले में ज्ञानेश नामक व्यक्ति का कहना है कि वह रफतगंज का रहने वाला है और कोरोना पॉजिटिव होने पर दूसरी लहर के दौरान दीनदयाल अस्पताल में उनके पिता सतीश चंद्र वार्ष्णेय की मौत हो गई थी. उनका अंतिम संस्कार भी कोरोना गाइडलाइंस के तहत किया गया था. लेकिन स्वास्थ्य विभाग उन्हें मुआवजा नहीं दे रहा है और जिले में मुआवजा सूची में जो 108 लोगों के नाम बताए गए हैं, उसमें उनके पिताजी का नाम नहीं है. फिलहाल जिले में कोरोना मृतकों को लेकर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना अवधि के दौरान कोविड-19 से मरने वालों की सूची तैयार की गई है और इसमें 106 लोग हैं. इन्हें सरकार द्वारा ₹50000 मुआवजा दिया जा रहा है. हालांकि पहले 108 लोगों की सूची तैयार की गई थी और शकुंतला देवी जैसे दो मामले सामने आने के बाद सूची से उनका नाम हटा दिया गया है और 106 मृतकों का नाम नई सूची में शामिल किया गया है.