मुख्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, संविधान का मजाक उड़ा तो हम चुप नहीं बैठेंगे

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और विधानसभा अध्यक्ष को कड़ी फटकार लगाई है और कहा है कि अगर संविधान का मजाक उड़ाया जाएगा तो शीर्ष अदालत चुप नहीं हैठेगी। दरअसल, तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने दलील दी थी कि अदालत स्पीकर को उन विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने का निर्देश नहीं दे सकती, जो कथित रूप से दलबदल कर दूसरी पार्टी में चले गए हैं।
इस पर शीर्ष न्यायालय ने कहा कि संविधान के रक्षक के रूप में वह आदेश पारित करने में शक्तिहीन नहीं है, खासकर तब जब दलबदल विरोधी कानून से संबंधित "दसवीं अनुसूची का मजाक" उड़ाया जा रहा हो।
जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के विधानसभा में दिए गए उस कथित बयान पर भी आपत्ति जताई कि कोई उपचुनाव नहीं होगा। जस्टिस गवई ने कहा, ‘‘यदि यह बात सदन में कही गई है, तो आपके मुख्यमंत्री दसवीं अनुसूची का मजाक उड़ा रहे हैं।’’ संविधान की दसवीं अनुसूची दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रावधानों से संबंधित है।
पीठ तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य करार देने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर निर्णय लेने में कथित देरी से संबंधित दलीलों को सुन रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पीकर से पूछा कि उन्होंने कांग्रेस में शामिल हुए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों की अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर नोटिस जारी करने में लगभग 10 महीने का समय क्यों लगाया? इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने दलील दी थी कि अदालत स्पीकर को दल-बदल के मामले में विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने का निर्देश नहीं दे सकती।





