भारत

पति से धोखा खा रही महिला की बात सुनी सुप्रीम कोर्ट ने, कॉल और होटल स्टे की डिटेल्स पेश करने के निर्देश

Nil dhankar
4 July 2026 6:45 AM IST
पति से धोखा खा रही महिला की बात सुनी सुप्रीम कोर्ट ने, कॉल और होटल स्टे की डिटेल्स पेश करने के निर्देश
x
पढ़े पूरी खबर

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले निजता के अधिकार (Right to Privacy) का इस्तेमाल कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी से अपने मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और होटल में रुकने की जानकारी छिपाने के लिए नहीं कर सकता है। विशेषकर तब जब मामला व्यभिचार साबित करने से जुड़ा हो। देश की सर्वोच्च अदालत ने उस व्यक्ति की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसने दावा किया था कि अदालत में ऐसी जानकारियां सार्वजनिक करना उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि निजता का अधिकार असीमित या पूर्ण नहीं है। सार्वजनिक और न्याय के हित में इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की ही एक संविधान पीठ के पुराने आदेश का हवाला दिया था, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि विवाह से इतर सहमति से बनाए गए यौन संबंधों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें पति के होटल में ठहरने के रिजर्वेशन विवरण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, "भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता का अधिकार आवश्यक रूप से उचित प्रतिबंधों के अधीन है, खासकर तब जब ये प्रतिबंध जनहित में हों। हिंदू विवाह अधिनियम स्पष्ट रूप से व्यभिचार को तलाक के आधार के रूप में मान्यता देता है। इसलिए, यह बिल्कुल भी जनहित में नहीं होगा कि अदालत निजता के अधिकार की आड़ में किसी ऐसे विवाहित पुरुष की मदद करे, जिस पर अपनी शादी के अस्तित्व में रहते हुए बाहर किसी अन्य महिला से यौन संबंध बनाने का आरोप हो।" हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ पति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले में कोई कानूनी खामी नहीं पाई और व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया।

यह कानूनी विवाद 1998 में शादी के बंधन में बंधे एक जोड़े से जुड़ा है, जिनकी साल 2000 में एक बेटी हुई। कुछ समय बाद पत्नी को पता चला कि उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) है और वह उस महिला के साथ जयपुर के एक होटल में रुका था। इस धोखे का पता चलने के बाद पत्नी ने पति के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया और व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग की। अपने आरोपों को साबित करने के लिए पत्नी ने अदालत से पति के कॉल रिकॉर्ड और होटल स्टे की डिटेल्स मंगवाने की गुहार लगाई थी, जिसे पति ने अपनी निजता का हनन बताते हुए चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पारिवारिक विवादों में व्यभिचार साबित करने के लिए डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों को पेश करने का रास्ता और साफ हो गया है।

Next Story