वायुसेना के बर्खास्त अधिकारी को सम्मानजनक विदाई देने के निर्देश, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पूर्व स्क्वाड्रन लीडर आर. सूद की 1993 की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वायुसेना द्वारा लिया गया यह निर्णय कानूनी रूप से अस्थिर और दोषपूर्ण था। अदालत द्वारा आर. सूद को दिए गए मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
औपचारिक विदाई: वायुसेना प्रमुख द्वारा तय की गई तारीख पर उन्हें सेना के नियमों के तहत उसी तरह विदाई दी जाएगी, जिसके वे अपनी सेवा पूरी करने के बाद हकदार होते।
आर्थिक लाभ और पदोन्नति: उन्हें 50% पिछला वेतन, अनुमानित पदोन्नति और पेंशन के सभी लाभ दिए जाएंगे।
ब्याज: उन्हें 1990 के दशक में दायर की गई रिट याचिका की तारीख से उनके सभी बकाया राशि पर 9% का ब्याज भी दिया जाएगा।
आर. सूद को 22 सितंबर 1993 को वायुसेना अधिनियम की धारा 19 के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। यह कार्रवाई 1987 की एक घटना से जुड़ी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक नागरिक ड्राइवर को रेगिस्तान के एक सुनसान इलाके में छोड़ दिया गया था, जहां बाद में उसके अवशेष मिले थे। इसी मामले में कदाचार का दोषी मानते हुए वायुसेना ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था।





