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सारना स्थल पहुंचीं राष्ट्रपति
Paharpur पहाड़पुर। राष्ट्रपति ने पहाड़पुर गांव में आयोजित संताली जाहिर और हो जाहिर परंपराओं के प्रदर्शन में भाग लेकर आदिवासी समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दिया। इस दौरान उन्होंने पवित्र जाहिर स्थल (सारना/पवित्र उपवन) में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और आदिवासी समाज की आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह पवित्र उपवन केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों और प्रकृति के बीच गहरे एवं संतुलित संबंध का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि संताली और हो समुदायों की ये परंपराएं प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक जीवन और आध्यात्मिक मूल्यों का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और आदिवासी समाज की परंपराएं इस विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी ये परंपराएं हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। आधुनिक समय में भी इन सांस्कृतिक मूल्यों की प्रासंगिकता बनी हुई है।
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, भाषा, कला और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक इन अमूल्य परंपराओं को सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों और आदिवासी प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें आदिवासी जीवन, प्रकृति और लोक आस्था की झलक देखने को मिली।
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