
बांग्लादेश और चीन के बीच तीस्ता और अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग को लेकर 13 समझौतों पर साइन किए गए हैं। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने बीजिंग में बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ वार्ता की, जिसमें चीन ने भविष्य में रणनीतिक विश्वास बढ़ाने, ठोस सहयोग का विस्तार करने और गहरे द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने की अपनी तत्परता की पुष्टि की।बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ती यह करीबी भारत के लिए टेंशन की वजह बन सकती है। वहीं तीस्ता नदी का प्रबंधन भारत के लिहाज से बेहद संवेदनशील मुद्दा है। तीस्ता जल प्रबंधन को लेकर चीन के साथ सहयोग का असर भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर पड़ सकता है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान इन दिनों चीन के दौरे पर हैं।
चीन कई सालों से तीस्ता नदी के प्रबंधन और बहाली परियोजना में रुचि दिखा रहा था। हालांकि शेख हसीना की सरकार में यह संभव नहीं हो सका। यह परियोजना सिलिगुड़ी कॉरिडरोर के पास ही है। यही भारत के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। इसे चिकन नेक के नाम से भी जाना जाता है। बांग्लादेश ने चीन को तीस्ता नदी परियोजना में सीधी एंट्री दे दी है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने सबसे पहले चीन की ही यात्रा की है। यह भारत के लिए बड़ा संदेश है। मलेशिया में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक पोरम (WEF) में हिस्सा लेने पहुंचे रहमान वहीं से सीधे चीन के दैलियान शहर पहुंच गए। यहां से वह हाई स्पीड ट्रेन से बीजिंग पहुंचे। वह बीजिंग में कई बड़े नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके आलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग से भी मुलाकात होगी। बांग्लादेश ने सीधा संदेश दिया है कि वह भारत के मुकाबले चीन से ज्यादा रिश्ते मजबूत करना चाहता है।
चीनी मंत्री ली गुओयिंग के साथ बैठक में तारिक रहमान ने बांग्लादेश की नदियो को लेकर अपना पूरा प्लान बता दिया और सारी जानकारी साझा कर दी। तारिक रहमान का दावा है कि वह बांग्लादेश में हर साल आने वाली बाढ़ के खतरे कोटालना चाहते हैं। तारिक रहमान ने चीन से तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए चीन से आधुनिक तकनीक और वित्तीय मदद मांगी है। इसके अलावा कटाव को रोकने और सिंचाई के ढांचे को मॉडर्न बनाने के लिए भी मदद मांगी है।





