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यूएई में मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों का छलका दर्द, भारत हर संभव सहायता को तैयार, पढ़े पूरी स्टोरी

jantaserishta.com
5 Feb 2022 5:24 AM GMT
यूएई में मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों का छलका दर्द, भारत हर संभव सहायता को तैयार, पढ़े पूरी स्टोरी
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नई दिल्ली: 'पहले ऐसे लगा जैसे पटाखे फूट रहे हैं फिर सारी दुनिया खुद छिटकती नजर आई'- रमजान रथ को तेज दर्द हुआ. उन्होंने नीचे देखा तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वो आग पर बैठे हैं. यूएई में यमन के हूती विद्रोहियों के हमले में जख्मी हुए रमजान ने समाचार एजेंसी एपी से पूरी आपबीती साझा की है.

पिछले महीने यमन के हूती विद्रोहियों ने अबू धाबी पर ड्रोन से घातक हमले किए जिसमें दो भारतीय सहित एक पाकिस्तानी नागरिक की मृत्यु हो गई. रमजान भी उस हमले के वक्त अपने ट्रक के सहारे खड़े होकर फॉर्म भर रहे थे. इस धमाके में उनके ईंधन वाले ट्रक का टैंकर ब्लास्ट कर गया. रमजान ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, 'मैंने अपनी आंखों के सामने अपना ट्रक जलते देखा. मेरे पैरों में आग लग गई थी. मैं भय से कांप उठा. सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि पता नहीं चला कि आखिर हुआ क्या है.'
रमजान के पैरों से खून बह रहा था लेकिन वो अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागे. कुछ समय बाद उन्हें अस्पताल में ले जाया गया.
राजस्थान के एक गांव से हैं रमजान
24 वर्षीय रमजान यूएई में पिछले कई सालों से रह रहे हैं. वो भारत के राजस्थान के एक छोटे गांव से हैं. उनके पिता खेती करते हैं और वो घर में सबसे छोटे हैं.
रमजान को हमले से यूएई और हूतियों के बीच चल रहे युद्ध के बारे में कुछ पता नहीं था. उन्हें नहीं पता था कि वर्षों से यमन में गृहयुद्ध चल रहा है जिसने उस देश को तबाह कर दिया है और हजारों नागरिकों की जान उनमें चली गई है.
....और अचानक सबकुछ बदल गया
कम वेतन पर काम करने वाले लाखों प्रवासियों की तरह ही रमजान भी चार साल पहले यूएई आए थे. उनके घर में चार बड़ी बहनें हैं. घर को चलाने का सारा जिम्मा रमजान पर ही है. वो ट्रक चलाने का काम करते हैं. भारत में स्थित उनके घर में कुछ कमी न हो, इसके लिए वो 12 घंटे काम करते थे.
लेकिन फिर भी ये भारत में काम करने की अपेक्षा उन्हें ज्यादा अच्छा लगता था. उन्होंने कहा कि यहां कि पुलिस ज्यादा ईमानदार है, सड़कें पक्की हैं. उन्हें यहां काम करते हुए सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं हुई लेकिन अचानक से सबकुछ बदल गया.
रमजान कहते हैं, 'मुझे शारीरिक और मानसिक पीड़ा दोनों है. जब मैं रात को सोता हूं, या जब भी अकेला होता हूं तो मुझे विस्फोट याद आता है.'
रमजान बताते हैं कि जब वो अस्पताल के बिस्तर में पड़े थे तो अपराधबोध से भर गए थे. वो सोचते रहते थे कि पिछले जन्म में उन्होंने जरूर कोई गलत काम किया होगा जो उनके साथ ये हुआ. वो ये भी सोचते थे कि क्या उन्होंने कभी किसी को अपनी ट्रक से रौंद दिया जो उनके साथ ये हुआ.
उनके पैर में 10 टांके लगे हैं और दर्द बराबर बना रहता है. वो लंगड़ाकर चलते हैं. उनका ट्रक जल चुका है. जब तक वो ठीक नहीं हो जाते, काम नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि वो अपने परिवार को कभी नहीं बताएंगे कि उनके साथ क्या हुआ था. इस दर्द को परिवार वाले सहन नहीं कर पाएंगे.
बिछड़ गया नवविवाहित जोड़ा
उस हमले में भारत और पाकिस्तान के उनके तीन सहयोगी मारे गए. उनमें से एक थे हरदीप सिंह. 29 साल के हरदीप की हाल ही में शादी हुई थी. उनकी पत्नी कनाडा में रहती हैं और वो जल्द ही उनसे मिलने जाने वाले थे.
भारत के पंजाब के रहने वाले हरदीप के चचेरे भाई गगनदीप सिंह ने कहा, 'घर खाली हो गया है. वो हमारे जीवन की रोशनी था. हम सब उससे प्यार करते थे.'
हरदीप अपने परिवार में अप्पू के नाम से जाने जाते थे. उनके पिता की मृत्यु हो गई थी और वो अपनी मां के इकलौती संतान थे. पिछले साल ही हरदीप की पंजाब में शादी हुई थी और उसके बाद वो यूएई काम पर लौट आए. वो अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी में एक टैंकर ड्राइवर का काम करते थे.
हरदीप ने उस दिन रात को काम किया. अगले दिन सोमवार को उनका साथी छुट्टी पर चला गया जिसके बाद हरदीप को उसकी जगह काम पर जाना पड़ा और वहीं ब्लास्ट में उनकी मौत हो गई.
मौत की खबर सुन उनकी 21 वर्षीय पत्नी कनुप्रिया कौर की तबीयत खराब हो गई है. उन्होंने फोन पर बात करते हुए कहा, 'मेरे पास कोई शब्द नहीं है. मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई...मेरे पास बस उसकी यादें हैं.'


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