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बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका-पाकिस्तान का नया समीकरण, भारत के लिए कितनी चिंता की बात?

jantaserishta.com
17 May 2026 5:09 PM IST
बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका-पाकिस्तान का नया समीकरण, भारत के लिए कितनी चिंता की बात?
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में आयोजित वार्ता में अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। हालांकि, पाकिस्तान इस पूरी स्थिति में खुद को मध्यस्थ की तरह पेश कर रहा है, लेकिन उसकी भूमिका पर लगातार प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। हाल के समय में ट्रंप, मुनीर को अमेरिका के करीब ला रहे हैं। ताजा हालात में वर्ल्ड ऑर्डर तेजी से बदल रहा है। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच ये बदलता समीकरण भी इसी वर्ल्ड ऑर्डर का एक हिस्सा माना जा सकता है।
पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार में परिवर्तन भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान से देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ये दावा किया है कि उनके कहने पर भारत ने सीजफायर किया। हालांकि, भारत लगातार ट्रंप के इस दावे को खारिज करता आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों से बात करके व्यापार का आश्वासन देकर पांच घंटे के भीतर इस युद्ध को रुकवाया। हालांकि, मई 2026 में फिर ट्रंप ने ही बयान दिया कि व्यापार और ऊंचे टैरिफ की धमकी देकर केवल 5 घंटे के भीतर युद्ध रुकवाया था। इसके बाद ट्रंप ने फिर बयान दिया कि उन्होंने यह सीजफायर पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के अनुरोध पर 'एक एहसान' के तौर पर कराया था।
दरअसल, किसी के सामने हाथ फैलाने की पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है। पाकिस्तान को आर्थिक मदद के लिए अमेरिका की काफी जरूरत है और वर्तमान समय में ईरान के साथ युद्ध वाले हालात के बीच वाशिंगटन भी इस्लामाबाद का इस्तेमाल कर रहा है।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान को जब भी भारत से सैन्य या रणनीतिक स्तर पर बड़ा खतरा महसूस होता है, तो वह वाशिंगटन के पास जाता है। वह अमेरिका को यह डर दिखाता है कि दो परमाणु संपन्न देशों की जंग से पूरी दुनिया खतरे में पड़ जाएगी, जिसके बाद अमेरिका बीच में दखल देता है।
पाकिस्तान के साथ किसी भी मामले को भारत हमेशा से ही द्विपक्षीय विवाद बताता है और किसी भी तीसरे देश के हस्तक्षेप का सख्ती से विरोध करता है। यही कारण है कि भारत ट्रंप के इन दावों को शुरुआत से ही इनकार करता रहा है और यह कहता रहा है कि भारत अपने फैसले किसी के दबाव में आकर नहीं लेता है।
इसका सबूत खुद पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार हैं। इशाक डार ने भी ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए माना था कि यह सीजफायर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बात के बाद हुआ था, न कि ट्रंप के दबाव से।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति की अगर बात की जाए, तो उन्होंने ऐसे लगभग छह युद्धों में सीजफायर कराने का क्रेडिट खुद को दिया है। आलम यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद के लिए नोबल शांति पुरस्कार की मांग भी कर दी।
दूसरी तरफ पाकिस्तान और बांग्लादेश अपनी ऐतिहासिक कड़वाहट को भूलकर आगे बढ़ रहे हैं। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से पाकिस्तान के साथ इसकी नजदीकी बढ़ती नजर आई है। ऐसे में पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ अपने ऐतिहासिक कड़वाहट को भूलकर भारत को घेरने के लिए कूटनीतिक और सैन्य पैठ बढ़ा रहा है।
वहीं, अमेरिका अपनी वैश्विक सुपरपावर की होड़ में चीन को मात देने के लिए बांग्लादेश में अपने जहाज तैनात करने की डील कर रहा है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनीतिक फायदा बन गई है, क्योंकि उसे भारत के ठीक बगल में अमेरिका की सैन्य छत्रछाया मिल रही है, जो नई दिल्ली के लिए आने वाले समय में एक गंभीर रणनीतिक सिरदर्द साबित होगी।
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