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शख्स ने वीभत्स घटना को दिया अंजाम, नहीं पहुंचे पिता और बड़े भाई

Nilmani Pal
21 April 2026 7:12 AM IST
शख्स ने वीभत्स घटना को दिया अंजाम, नहीं पहुंचे पिता और बड़े भाई
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यूपी। कानपुर के किदवईनगर स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में 11 वर्षीय मासूम जुड़़वा बेटियों की हत्या करने वाले शशिरंजन के पिता और बड़े भाई ने भी उससे मुंह मोड़ लिया है। वीभत्स घटना के बाद उसके परिवार का कोई भी सदस्य कानपुर नहीं आया। बेटियों की मां रेशमा छेत्री ने बताया शनिवार सुबह घटना के बाद जब पुलिस ने उसे जगाया तो सबसे पहले उसने शशिरंजन के बड़े भाई राजीव मिश्रा को ही फोन कर पूरी घटना बताई। राजीव ने पिता शेखर मिश्रा को पूरी जानकारी दी। इस पर उन्होंने कहा जैसा किया वैसा भुगते। इसके बाद कुछ देर में वापस फोन करने की बात कही। हालांकि इसके बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। वहीं, रेशमा के मायके वाले सोमवार की रात में कानपुर पहुंच गए। उन्हें देख रेशमा फूट-फूटकर रोने लगी। शशि के एक रिश्तेदार ने ‘हिन्दुस्तान’ के प्रतिनिधि से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि शशि ने कम उम्र में ही बिहार छोड़ दिया था, इसके बाद वह कानपुर आ गया। यहां वह पहले मेडिकल लाइन में आया, फिर मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) बन गया। चूंकि पढ़ाई में ठीक था, इंग्लिश भी बोल लेता था, इसलिए अच्छा पैसा और कमीशन भी मिलने लगा। इसी के बाद से वह परिवारीजनों और रिश्तेदारों को निचले स्तर का समझने लगा। साथ ही शराब का भी आदी होता चला गया। जब बिहार के गया स्थित घर जाता तो पिता और भाई-भाभी से ठीक से बात भी नहीं करता। हालांकि जबतक मां गीता मिश्रा रहीं तब तक वह पत्नी के साथ दो बार बिहार भी आया, इसके बाद से आना-जाना बंद हो गया। रिश्तेदार फोन करते थे तो उनसे भी गाली गलौज करने लगता। शशि की रिश्ते में लगने वाली बहन स्वास्तिका ने भी बताया कि एक बार वीडियो कॉल करने पर उसके साथ गाली गलौज करने लगा था।

शशिरंजन के परिजनों ने भले ही मुंह मोड़ लिया हो, हालांकि रेशमा के परिजन सोमवार की रात कानपुर पहुंच गए। भाई को देख रेशमा फफक पड़ी। रेशमा ने जब हत्याकांड की जानकारी अपने मायके में दी तो वहां पर भी हड़कंप मच गया। देर रात रेशमा की बहन हेमा क्षेत्री, भाई बाल बहादुर और मौसेरा भाई कानपुर पहुंच गए। घटना के बाद दूसरे दिन बेटे को आनलाइन सैंडविच मंगाकर खिलाया गया। शशि की फुफेरी बहन स्वास्तिका खामोश रही तो रेशमा बेटियों की फोटो देखकर रोती रही।

त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में रहने वाले लोग भले ही शशिरंजन की हरकतों से तंग रहते रहे हों, पर उनकी बेटियां रिद्धि-सिद्धि सभी की लाडली थीं। कुछ अपार्टमेंटवासी तो उन्हें जब तक अपने पास बुलाकर थोड़ी देर हंसी-ठिठोली नहीं करते थे, तब तक मन नहीं भरता था। संजय भगनानी ने बताया कि बच्चे वैसे भी मन के सच्चे होते हैं, हालांकि रिद्धि-सिद्धि दोनों बहुत मासूम थीं, लेकिन उतनी नटखट भी थीं। स्कूल से आने के बाद अपार्टमेंट की लॉबी और सीढ़ियों में खूब भागदौड़ करती थीं, कई बार बेल बजाकर भागतीं, लेकिन उनकी हरकतें सभी को प्यारी लगती थीं।


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