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अब तक का सबसे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, भारतीय सेना की भी ली जारी है मदद, अब तक खर्च हुए 1.5 करोड़

jantaserishta.com
7 July 2021 9:20 AM GMT
अब तक का सबसे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, भारतीय सेना की भी ली जारी है मदद, अब तक खर्च हुए 1.5 करोड़
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जयपुर/पाली:- राजस्थान के पाली जिले में बीते 15 दिनों से एक रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है, जो अब तक का सबसे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन बताया जा रहा है। 21 जून को पाली के सोजत शहर में स्थित बोरेंदी गांव में एक 80 साल पुराने कुएं की मरम्मत के दौरान 15 वर्षीय किशोर नरेंद्र नायक इसमें गिर गया। जिसके बाद उसे निकालने के लिए पाली जिला प्रशासन और सशस्त्र बलों की ओर से अभियान चलाया गया। हालांकि, 15 दिन से जारी इस अभियान के बाद भी अब तक नरेंद्र का शव बरामद नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों ने घटना के सात दिन बाद मिशन को छोड़ने का प्रस्ताव दिया था। टीम ने यह कहते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को बंद करने की बात कही थी कि मलबे के नीचे लड़के के इतने लंबे समय तक जीवित रहने की कोई संभावना नहीं है। लेकिन किशोर की मां इंदिरा देवी ने अपने बेटे के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की मांग की। ऐसे में जिला प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया, फिलहाल सेना के साथ किए जा रहे इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जिला प्रशासन को कोई सफलता नहीं मिली है।
मिली जानकारी के अनुसार यह कुआं 185 फीट गहरा और आठ फीट चौड़ा है। ऐसे में इसके मलबे में दबे नरेंद्र को निकालना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, एक मां और लोगों की इच्छा से प्रेरित होकर बचाव दल निरंतर नरेंद्र को खोजने में लगा हुआ है। बताया जा रहा कि इस रेस्क्यू में 100 सदस्यीय टीम, 3 ग्राइडिंग मशीन और 5 जेसीबी लगी है, जो अभी भी कुएं को सावधानी के साथ खोद रही हैं। बचाव दल के दैनिक खर्च को छोड़कर अब तक मिशन पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
ऐसे घटी थी घटना
मिली जानकारी के अनुसार दुर्घटना तब हुई थी जब नरेंद्र दरारों को भर रहा था। वह कुएं के 40 फीट नीचे काम कर रहा था। इसी दौरान तभी दीवार का एक हिस्सा ढह गया और दीवार की रेत नरेंद्र पर गिरती रही और वो मलबे में दब गया। बताया जा रहा है कि कुएं में दो मजदूर काम कर रहे थे, दूसरा मजदूर अनुभवी था और उसे रस्सी से बांधकर सुरक्षित बाहर निकल गया, लेकिन नरेंद्र के ज्यादा नीचे चले जाने और मलबे में दबने के कारण उसे खोजना मु्श्किल हो गया।
सेना के इंजीनियरों की ली गई मदद
लगातार तीन दिन तक जिले के विशेषज्ञों की टीम ने रेस्क्यू के सारे प्रयास किए, लेकिन जब सफलता मिलती नहीं दिखी, तो सेना के इंजीनियरों को बुलाया गया। सेना के इंजीनियरों ने दो भारी सबमर्सिबल मशीनों का उपयोग करके भारी मशीनों को खोदने, मलबा उठाने और पानी निकालने के लिए प्रयास किए। इसके बाद 8वें दिन आठ फीट नीचे कीचड़ में नरेंद्र का एक जूता मिला। उसके बाद से अब तक कोई संकेत नहीं मिला है।
अपने परिवार का इकलौता चिराग था नरेंद्र
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार नायक अपने परिवार में इकलौता बेटा था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लिहाजा उसने महज 500 रुपये में कुएं की दरार को सीमेंट से भरने के लिए हामी भर दी थी। यह जानकारी भी मिली है कि क्योंकि साइट कमजोर थी, लिहाजा अनुभवी मजदूरों ने काम करने से इनकार कर दिया था। लेकिन नरेंद्र और एक अन्य मजदूर ने काम करने की हामी भर दी, तो कुएं की मरम्मत की जा रही थी। मिली जानकारी के अनुसार नायक के चाचा ने कुएं के मालिक के खिलाफ बाल श्रम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करवा दिया है।
इस संबंध में सोजत सिटी के पुलिस अधिकारी हेमंत कुमार ने बताया कि 'किशोर की मां की हालत ठीक नहीं है। आघात के कारण कुछ दिन पहले उन्हें एक ड्रिप दी गई थी। उनका कहना है कि पहले यह तय किया गया था कि मिशन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमें लड़का नहीं मिल जाता। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश गिरती है और बचावकर्मियों के लिए खतरा पैदा होता है, तो ऐसे में मिशन को रोकना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल परिवार के आग्रह पर अभी भी टीम रेस्क्यू जारी रखे हुए है।

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