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New Delhi. नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कहां हैं और उनकी हालत कैसी है, यह सवाल इस समय देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। चार नवंबर के बाद से उनके परिवार का कोई सदस्य, न ही कोई वकील, उनसे अदियाला जेल में मुलाकात कर पाया है। लंबे समय से जारी इस चुप्पी ने उनके सेहतमंद होने पर गंभीर संदेह खड़ा कर दिया है। इसी चिंता की वजह से मंगलवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट और रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल के बाहर इमरान खान की बहनों और बड़ी संख्या में पहुंचे समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार जानबूझकर इमरान खान की स्थिति छुपा रही है और मुलाकात पर रोक लगाकर किसी बड़े राज को पर्दे में रख रही है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इमरान खान की बहनों और समर्थकों के लगातार बढ़ते दबाव के चलते आखिरकार जेल प्रशासन ने उनकी एक बहन को मुलाकात की अनुमति दे दी है। इस फैसले से उम्मीद बनी है कि शायद अब उनके स्वास्थ्य को लेकर जारी सस्पेंस कुछ हद तक खत्म हो सकेगा, हालांकि अभी तक इस मुलाकात के बाद कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी बीच, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर भी बड़ी संख्या में PTI समर्थक इकट्ठा हुए, जिन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इमरान खान को तुरंत रिहा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ता ने कहा कि सरकार अब इमरान खान के नाम से भी बेचैन हो गई है और वह किसी भी तरह से उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि जब तक इमरान खान की बहनों को उनसे मिलने की पूरी अनुमति नहीं मिलती, तब तक वे प्रदर्शन जारी रखेंगे।
हालांकि अदालत के आदेश साफ़ तौर पर इमरान खान से मुलाकात की इजाजत देने के पक्ष में हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी बहनों और वकीलों को अब तक नियमित रूप से मिलने की मंजूरी नहीं दी गई है। अदियाला जेल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे PTI समर्थकों ने कहा कि मुलाकात पर रोक यह संकेत है कि इमरान खान की वास्तविक स्थिति को छिपाया जा रहा है। इमरान खान की बहनों अलीमा खान, नूरीन खान और आजमी खान ने भी जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मुलाकात न होने की वजह से उन्हें अपने भाई की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता है। तीनों बहनें जेल के बाहर प्रदर्शन में शामिल रहीं और उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुलाकात में बाधा डालना किसी बड़ी बात की तरफ इशारा करता है। इस बीच, इमरान खान के बेटे ने भी रॉयटर्स से बातचीत में गंभीर आशंका जताई है। उनका कहना है कि उनके पिता के साथ संभवतः ऐसा कुछ हुआ है जिसे बदला नहीं जा सकता, और इसी वजह से प्रशासन उन्हें परिवार या वकीलों से मिलने नहीं दे रहा। इमरान खान के बेटे के इस बयान ने पूरे मामले को और गहरा बना दिया है। क्योंकि पिछले कई दिनों से न तो इमरान खान की कोई ताजा तस्वीर सामने आई है।
न ही किसी विश्वसनीय स्रोत ने उनके सही-सलामत होने की पुष्टि की है। यह स्थिति राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। इमरान खान की मौजूदगी और सेहत को लेकर शुरू हुए इन सवालों के बीच खैबर पख्तूनख्वा में उनकी पार्टी PTI की सरकार को बर्खास्त करने की खबरें भी तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार राज्य में गवर्नर शासन लागू करने पर विचार कर रही है, क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी खुलकर इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं और लगातार विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री का इस तरह खुले मंच पर सरकार के खिलाफ खड़ा होना इस राजनीतिक संकट को और गहरा कर रहा है। कुल मिलाकर, इमरान खान की सेहत और उनकी वास्तविक स्थिति पर अभी भी पूरी तरह पर्दा पड़ा हुआ है। मुलाकात के दरवाजे बंद रहने से परिवार, पार्टी और लाखों समर्थकों की चिंता कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। जेल प्रशासन और सरकार की खामोशी ने कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। जब तक इमरान खान के परिवार या वकीलों को पूरी तरह से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलती, तब तक यह विवाद और गहराता ही जाएगा और पाकिस्तान की राजनीति में अस्थिरता बनी रहेगी।
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