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IMF ने भारत की 2025 तक की विकास दर को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया
jantaserishta.com
19 Jan 2026 3:54 PM IST

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वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सोमवार को साल 2025 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान पहले की तुलना में 0.7 प्रतिशत ज्यादा है। आईएमएफ ने इसके पीछे की वजह साल के दूसरे हिस्से में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन को बताया है।
आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में बेहतर नतीजे और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार के चलते भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया गया है। इससे यह भी साफ होता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
हालांकि, आईएमएफ का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास दर में थोड़ी कमी आ सकती है। अनुमान के मुताबिक, साल 2026 और 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर घटकर 6.4 प्रतिशत रह सकती है।
इसके बावजूद, आईएमएफ ने कहा है कि भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का एक प्रमुख इंजन बना रहेगा। आईएमएफ के अनुसार, इन देशों की औसत विकास दर 2026 और 2027 में सिर्फ 4 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उभरते और विकासशील एशियाई देशों को तकनीक से जुड़े निवेश और व्यापार का फायदा मिल रहा है, भले ही दुनिया की आर्थिक गति हर जगह एक जैसी न हो। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, वैश्विक आर्थिक विकास दर 2026 में 3.3 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान है। इसमें व्यापार तनाव कम होना, वित्तीय हालात का अनुकूल होना और खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों से जुड़े निवेश में तेजी अहम भूमिका निभाएगी।
महंगाई को लेकर भी भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है। आईएमएफ का कहना है कि 2025 में महंगाई में बड़ी गिरावट के बाद भारत में महंगाई दर फिर से तय लक्ष्य के करीब आ सकती है। इसका कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों का नियंत्रण में रहना है, जिससे घरेलू मांग को सपोर्ट मिलेगा।
हालांकि, आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य को लेकर कुछ जोखिम अभी बने हुए हैं। अगर एआई से मिलने वाले फायदे उम्मीद से कम रहे, तो निवेश घट सकता है और वैश्विक वित्तीय हालात सख्त हो सकते हैं, जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा।
वहीं, आईएमएफ का कहना है कि अगर एआई को तेजी से अपनाया गया और उससे उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई, तो वैश्विक आर्थिक विकास को गति मिल सकती है, बशर्ते वित्तीय जोखिम नियंत्रण में रहें।
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