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बच्ची 7 साल से गायब, हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख, कई अफसर किए तलब

Nil dhankar
12 May 2026 3:13 PM IST
बच्ची 7 साल से गायब, हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख, कई अफसर किए तलब
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई छह वर्षीय बच्ची के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में वर्ष 2018 से लेकर अब तक गुमला में पदस्थापित रहे सभी पुलिस अधीक्षकों और मामले के जांचकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि पुलिस इस मामले में अब भी विफल रहती है, तो जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित कर दी जाएगी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लगभग सात साल बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला है, जो पुलिस तंत्र की विफलता को दर्शाता है। मामला हाईकोर्ट में आने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और बार-बार समय की मांग की जा रही है। ऐसी स्थिति में अदालत ने माना कि मामले को सीबीआई को सौंपना ही न्यायसंगत होगा। इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया था कि विशेष जांच दल विभिन्न राज्यों में छानबीन कर रहा है और वर्ष 2018 के दौरान संबंधित आयु वर्ग के यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री के लिए रेलवे से विवरण मांगा गया था। हालांकि, इन दलीलों से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक बच्ची का पता न चल पाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह पुलिस की जांच क्षमता पर भी गंभीर संदेह पैदा करता है।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक और गुमला एसपी भी अदालत के समक्ष पेश हुए थे, लेकिन जांच में कोई सार्थक प्रगति नहीं दिखी। हाईकोर्ट ने पूर्व में भी लापता बच्चों के मामलों में डेटा के प्रभावी इस्तेमाल और मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने पर जोर दिया था, मगर धरातल पर इस मामले में कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। खंडपीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तिथि निर्धारित की है, जिसमें तलब किए गए सभी अधिकारियों को उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

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