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प्रियंका के पीएस के नाम पर मंत्री बनाने का खेल

Saba Naaz
16 July 2026 10:17 PM IST
प्रियंका के पीएस के नाम पर मंत्री बनाने का खेल
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केरल: एक चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव (पीएस) के नाम का इस्तेमाल कर एक विधायक को मंत्री पद दिलाने का झांसा दिया गया। ठगों ने कथित तौर पर मंत्री पद दिलाने के बदले तीन करोड़ रुपये की मांग की। मामले की जानकारी सामने आने के बाद वायनाड साइबर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, ठगी की कोशिश करने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रियंका गांधी के निजी सचिव डी.एस. राजकुमार के रूप में पेश किया। उसने कांग्रेस विधायक के. विद्या बालकृष्णन से संपर्क किया और दावा किया कि केरल में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होने वाला है। इसी दौरान उसने विधायक को मंत्री पद दिलाने का भरोसा देते हुए तीन करोड़ रुपये की मांग की।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एलाथुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक के. विद्या बालकृष्णन को 6 जुलाई को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रियंका गांधी का निजी सचिव बताया और करीब 10 मिनट तक अंग्रेजी में बातचीत की। बातचीत के दौरान उसने विधायक को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनके लिए मंत्री पद की व्यवस्था की जा सकती है।

हालांकि, विधायक को बातचीत के दौरान कुछ संदेह हुआ। उन्होंने बिना किसी जल्दबाजी के मामले की पुष्टि करने के लिए सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा के दिल्ली कार्यालय से संपर्क किया। वहां से जानकारी मिलने के बाद स्पष्ट हुआ कि ऐसा कोई फोन या प्रस्ताव प्रियंका गांधी के कार्यालय की ओर से नहीं दिया गया था। इसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

पुलिस के अनुसार, ठगों ने केवल विधायक के. विद्या बालकृष्णन को ही निशाना नहीं बनाया था, बल्कि कांग्रेस के अन्य नेताओं से भी संपर्क करने की कोशिश की गई थी। इनमें कांग्रेस सांसद शफी परम्बिल और डीन कुरियाकोस के नाम भी सामने आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी राजनीतिक पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल कर कई नेताओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा था।

इस मामले में प्रियंका गांधी के वास्तविक निजी सचिव डी.एस. राजकुमार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि यह फर्जी कॉल दिल्ली से की गई थी। जांच एजेंसियों ने एक संदिग्ध की पहचान भी कर ली है। अब केरल साइबर पुलिस की एक विशेष टीम मामले की आगे की जांच के लिए दिल्ली जाने की तैयारी कर रही है। पुलिस आरोपी तक पहुंचने और इस पूरी साजिश के पीछे शामिल लोगों का पता लगाने में जुटी हुई है।

राजनीतिक क्षेत्र में इस तरह की ठगी की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, जहां प्रभावशाली नेताओं या अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देने की कोशिश की जाती है। लेकिन इस मामले में मंत्री पद जैसे बड़े राजनीतिक पद का लालच देकर करोड़ों रुपये की मांग किए जाने से इसकी गंभीरता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में नेताओं और आम लोगों को किसी भी तरह के पद, नियुक्ति या सरकारी लाभ के नाम पर आने वाले प्रस्तावों की तुरंत पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी बड़े राजनीतिक पद या जिम्मेदारी के लिए पैसे की मांग होना अपने आप में संदेह का कारण है।

फिलहाल वायनाड साइबर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ठगी की योजना किसने बनाई, इसमें कितने लोग शामिल हैं और क्या इससे पहले भी इस तरह की कोई वारदात की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।

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