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भारत में ब्लैक फंगस से ऑप्टिक न्यूराइटिस का पहला मामला आया सामने...जानिए क्या हैं लक्षण?

AJAY
21 Jun 2021 4:00 PM GMT
भारत में ब्लैक फंगस से ऑप्टिक न्यूराइटिस का पहला मामला आया सामने...जानिए क्या हैं लक्षण?
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ऑप्टिक न्यूराइटिस का पहला मरीज मिला

कानपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कोरोना संक्रमण कम होने के बाद कानपुर (Kanpur) के हैलट अस्पताल में ब्लैक फंगस से ऑप्टिक न्यूराइटिस का पहला मरीज रविवार को मिला है. अस्पताल के डॉक्टरों का दावा है कि यह देशभर में पहला केस है. इसमें मरीज की आंखों की नसों में सूजन आ जाती है. नसों में खराबी आने से मरीज की आंखों की रोशनी चली जाती है. उधर, हैलट में भर्ती मरीज के इलाज के साथ डॉक्टरों ने उस पर शोध भी शुरू कर दिया है. कोरोना की पहली लहर में ऑर्टरी ब्लॉकेज का सिर्फ एक रोगी आया था. दूसरी लहर में इसके छह रोगी आए, जिनका हैलट में इलाज चल रहा है.

ऑप्टिक न्यूराइटिस से पीड़ित (30) वर्षीय आशीष को हैलट में 15 दिन पहले भर्ती कराया गया था. वह ब्लैक फंगस से पीड़ित थे. ऑप्टिक न्यूराइटिस ने ब्लैक फंगस के नए रूप को उजागर किया है. हैलट अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया ब्लैक फंगस की वजह से आर्टरी ब्लॉकेज के तो कई मरीज आए और उनका इलाज भी हमने किया. लेकिन ऑप्टिक न्यूराइटिस का यह पहला मरीज है. फिलहाल, उसकी दोनों आंखों की रोशनी काफी प्रभावित हुई है. खान के मुताबिक इस फंगल संक्रमण से नसों में सूजन आ जाती है और खून के थक्के जम जाते है जिसकी वजह से मरीज की आँखों की रोशनी चली जाती है।

देश का पहला मामला

नेत्र रोग विभाग की डॉ शालिनी मोहन ने बताया, अब तक देश में किसी भी अस्पताल में ऐसा कोई भी मरीज नहीं आया है. हमारा दावा है कि ऑप्टिक न्यूराइटिस का यह पहला मरीज है. हम लोग इस मरीज पर शोध पूरा करने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भेजा जाएगा, साथ ही हम लोग ब्लैक फंगस के मामलों पर भी अध्ययन कर रहे है.
ऑर्टरी ब्लॉकेज के अधिक रोगी

डॉ. परवेज ने बताया कि कोरोना के साथ या फिर निगेटिव होने के बाद जिन मरीजों को ब्लैक फंगस हुआ, उनकी आंख की ऑर्टरी में ब्लॉकेज की शिकायत थी. इलाज के लिए जो जल्दी अस्पताल पहुंचे, उनकी रोशनी बचाने की गुंजाइश रही. इस दौरान नेत्ररोग विभाग में ऑर्टरी ब्लॉकेज के अधिक रोगी आए. बताया कि ज्यादातर मरीज कोरोना से उबरने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट आए. दरअसल, कोरोना के इलाज में उन्हें स्टेरॉयड भी दी गई. अधिकांश मरीजों की कोरोना के इलाज के दौरान ब्लड शुगर बढ़ गई. इससे उन्हें ब्लैक फंगस का भी संक्रमण हुआ.

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