आज तड़के ढाई बजे खुल गए थे महाकाल मंदिर के पट, भस्म आरती Video

उज्जैन। महाशिवरात्रि 2026 पर आधी रात से मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे. उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के 2:30 बजे भस्म आरती के साथ 44 घंटे के निर्बाध दर्शन शुरू हुए, तो वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती और पुष्पवर्षा के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया. कानपुर, देहरादून, पुरी और जम्मू तक शिवभक्ति की विविध झलकियां दिखीं. कहीं हल्दी अनुष्ठान, कहीं जलाभिषेक, तो कहीं रेत कला और शोभायात्रा. देश के कोने-कोने में गूंजते 'हर-हर महादेव' के जयकारों के बीच आस्था, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला.
महाशिवरात्रि पर उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोल दिए गए. इसके साथ ही परंपरा के अनुसार भस्म आरती हुई. मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भस्म आरती के दर्शन करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया. इसके बाद केसर और चंदन का उबटन लगाकर श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई. दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया. फिर भांग और सूखे मेवों से सृष्टि के अधिपति का दिव्य श्रृंगार किया गया. अंत में भगवान को अति प्रिय भस्म अर्पित की गई. भस्म आरती के दौरान एक विशेष क्षण तब आया, जब मंदिर की लाइटें बंद कर दी गईं और केवल दीपों की रोशनी में बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कराए गए. यह दृश्य देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे. झांझ, मंजीरे और शंखध्वनि के बीच जब राजा महाकाल की आरती हुई, तो पूरा परिसर शिवमय हो गया.
#WATCH | Madhya Pradesh | A large number of devotees visit and queue up to offer prayers at the Mahakal Temple in Ujjain on the occasion of #Mahashivratri2026 pic.twitter.com/0ek8vW3nwr
— ANI (@ANI) February 14, 2026





