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कोरोना पॉजिटिव ससुर को पीठ पर उठाकर कई किमी चलीं थी बहू, लेकिन नहीं बच सकी जान, जाने पूरा मामला

jantaserishta.com
10 Jun 2021 10:50 AM IST
कोरोना पॉजिटिव ससुर को पीठ पर उठाकर कई किमी चलीं थी बहू, लेकिन नहीं बच सकी जान, जाने पूरा मामला
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असम के नगांव की रहने वाली निहारिका दास कोरोना पॉजिटिव ससुर को पीठ पर उठाकर 2 किमी चलीं थीं. इस दौरान लोगों ने उनकी फोटो खींची, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. उनकी एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. फोटो वायरल होने के बाद लोग निहारिका को आदर्श बहू कह रहे हैं. हालांकि इतनी कोशिशों के बाद भी निहारिका अपने ससुर को नहीं बचा सकीं.

दरअसल, 2 जून को निहारिका के ससुर थुलेश्वर दास में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए थे. लेश्वर राहा क्षेत्र के भाटिगांव में सुपारी के विक्रेता थे. तबीयत खराब होने पर उन्हें 2 किमी दूर के स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए बहू ने रिक्शे का इंतजाम किया. लेकिन रास्ता इतना ख़राब हैं कि वहां ऑटो रिक्शा भी नहीं आ सकता था. निहारिका के पति काम के लिए सिलीगुड़ी में रहते हैं. ऐसे में ससुर को पीठ पर ले जाने के अलावा निहारिका के पास कोई विकल्प नहीं था. निहारिका का एक 6 साल का बेटा भी है.
निहारिका की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई .स्वास्थ्य केंद्र में ससुर का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया और डॉक्टर ने ससुर की हालत गंभीर बताते हुए उन्हें 21 किमी दूर नगांव के कोविड हॉस्पिटल ले जाने के लिए कहा. स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें एंबुलेंस या स्ट्रेचर नहीं दिया गया था. इसके बाद उसने एक प्राइवेट कार का इंतजाम किया. इसके लिए भी निहारिका को अपने ससुर को पीठ पर उठाकर काफी दूर तक चलना पड़ा. इस दौरान लोग उन्हें घूरकर देखते तो रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की. ससुर लगभग बेहोश ही हो गए थे. उन्हें उठाने के लिए बहू को मानसिक और शारीरिक रूप से काफी ताकत लगानी पड़ी.
निहारिका के अनुसार नगांव पहुंचकर भी उसे कोविड अस्पताल में ससुर को पीठ पर उठाकर सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं. वहां भी उनकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया. निहारिका खुद भी कोरोना पॉजिटिव हैं.
वहीं निहारिका का कहना है कि हर व्यक्ति को एक दूसरे की मदद करना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि फोटो में एक चीज नहीं दिख रही, वह यह है कि मैं उस समय अकेली और पूरी तरह से टूटी हुई महसूस कर रही थी.वहीं उनकी फोटो वायरल होने के बाद लोग उन्हें सोशल मीडिया पर आदर्श बहू कह रहे हैं उनकी हर तारीफ कर रहे हैं.
निहारिका ने बताया कि उसे गांव में एंबुलेंस तक नहीं मिली. छोटी सी वैन से ससुर को शहर लाना पड़ा. हालांकि इस दौरान उनके ससुर को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी. लेकिन निहारिका की तमाम कोशिशों के बावजूद सोमवार को थुलेश्वर दास का निधन हो गया.

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