
x
छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग
Delhi दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने झारखंड में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगें मनवाने के लिए लंबा संघर्ष किया और हेमंत सोरेन सरकार को अब उनके खिलाफ नहीं जाना चाहिए। सौरव दास ने कहा कि व्यवस्था से परेशान होकर छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ा था। कोई भी छात्र कई दिनों तक सड़कों पर रहना और रात गुजारना नहीं चाहता। इसके बावजूद झारखंड के छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी और आखिरकार कुछ हासिल किया। ऐसे छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार को छात्रों के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखना चाहिए। जिन युवाओं ने अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। CJP प्रवक्ता ने 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सुनवाई के बाद उन्होंने रत्ना सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और अदालत में हुई कार्यवाही की जानकारी साझा की थी।
सौरव दास ने दावा किया कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के वकीलों से देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की सूची उपलब्ध कराने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने यह भी संकेत दिया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल संबंधित मामलों के निपटारे के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने की दिशा में बड़ी राहत मिल सकती है। दास के मुताबिक, 25 जुलाई को देशभर के युवाओं से यह प्रतिबद्धता जताई गई थी कि आंदोलन करने पर उनके खिलाफ एफआईआर नहीं होगी और पहले से दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा।
CJP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सूची मांगे जाने के बावजूद सरकार की तरफ से उस दिन इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दी गई। उन्होंने मांग की कि झारखंड में आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए और सरकार उनकी समस्याओं को बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से हल करे। सौरव दास ने कहा कि छात्रों ने लंबा संघर्ष अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किया है और आंदोलन के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना सही नहीं होगा।
Next Story





