भारत
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने के स्पीकर के फैसले को रखा बरकरार
jantaserishta.com
18 Jun 2026 1:00 PM IST

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी घमासान के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। गुरुवार को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें निष्कासित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में बहुमत वाले गुट का नेता और विपक्ष का नेता (एलओपी) माना गया था।
इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई थी। इसके बाद न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार सुबह उन्होंने अपना निर्णय सुनाते हुए स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले का अर्थ है कि फिलहाल रितब्रत बनर्जी विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे। इसके साथ ही टीएमसी के अल्पमत गुट द्वारा वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाए जाने का दावा फिलहाल कमजोर पड़ गया है।
वर्तमान में 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायकों के रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट के साथ होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, रितब्रत बनर्जी ने इसी सप्ताह दावा किया था कि उनके समर्थन में 64 विधायक हैं।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार मूल गुट के पास 20 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। अदालत ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना-अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस पूरे विवाद के बीच सीआईडी जांच भी जारी है। दरअसल, स्पीकर को सौंपे गए एक प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इस प्रस्ताव में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाने की बात कही गई थी।
हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का मुद्दा रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने उठाया था, जिसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की। इसके तुरंत बाद टीएमसी ने दोनों नेताओं को निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने बगावत कर दी और स्पीकर को नया प्रस्ताव सौंपते हुए स्वयं को टीएमसी विधायक दल का बहुमत गुट बताया। इसके बाद स्पीकर ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए रितब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी थी।
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