भारत-नेपाल सीमा से सुपारी और हवाला प्रतिवर्ष 30 हजार करोड़ का काला कारोबार

भारत सरकार को चूना लगाने का खेल संगठित हवाला कारोबारी कर रहे
सब्सिडी वाला यूरिया नेपाल को तस्करी और बदले में नेपाल से तस्करी कर सुपारी और किराना परचुरन, एफएमसीजी के सामान
भारत -नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से चोरी छुपे आता है गुटखा का कच्चा माल
टैक्स औऱ जीएसटी चोरी के लिए तस्करों ने लगा रखा है चार्टेड एकाउंटेंट
गुटखा की तस्करी और हवाला कारोबार में रसूखदारों का एकाधिकार
इंडिया से नेपाल हवाला रकम भेजने पर उल्टा मिलता है 2 फीसदी कमीशन
सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से बेखौफ चल रहा हवाला का कारोबार
प्रशासन के संज्ञान में सब कुछ होने के बाद भी मौन, अधिकारियों के संरक्षित
तस्कर देश को घुन की तरह कर रहे है चट
दिल्ली के प्रमुख हवाला कारोबारी- चांदनी चौक, खारीबावली, रोहणी, सदर बाजार में खुलेआम आफिस लगाकर हवाला कारोबार
पटना- गुरुहमंदर साहेब गुरुद्वारा के पास बजाज
प्लाजा मच्छर अड्डा हवाला का मुख्य केंद्र
रायपुर में हवाला कारोबारी बेखौफ आफिस लगाकर कालाधन हजार करोड़ का प्रतिदिन करते है- एमजी रोड, जेबी मॉल, फाफाडीह गली -3,5,6, गंजपारा, सुंदर नगर में कचौड़ी सेंंटर के सामने, सदर बाजार रायपुर जिसमें प्रमुख है
किसान के सब्सिडी यूरिया की तस्करी
भारत सरकार किसानों जो यूरिया में 70 फीसदी सब्सिडी देती है। जिसे तस्कर की गैंग इस यूरिया को पटना और बिहार के तस्कर कर नेपाल भेजती है। किसान यूरिया जो भारत सरकार 70 फीसदी सब्सिडी के साथ किसानों के लिए उपलब्ध कराती है उसको भी किसानों को वितरण नहीं कर तस्करी करने वाली गैंग बाहरी देशों को भारी भरकम भाव में सीमा बार बेच रहे है। इस तरीके से मोटा मुनाफा कमाते हैं यह तस्करी 2010 से हो रही है। सरकार, डीआरआई कस्टम और जीएसटी, पुलिस विभाग, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की आंख बंद।
कानपुर/नई दिल्ली (जसेरि)। गुटखा इंडस्ट्रीज वहां गुटखा की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं जितनी भी गुटखा फैक्ट्री है गुटखा फैक्ट्री वालों को कच्ची सुपारी भूंजी सुपारी छोटी इलायची बड़ी इलायची गुटके में डालने के लिए बड़े तादाद में लगती है यह और सब माल कच्ची सुपारी भूंजी सुपारी छोटी इलायची बड़ी इलायची यह सब माल नेपाल से आता है । काठमांडू से पहले यह सीमावर्ती इलाकों में आता है जैसे रक्सौल बिटछया सीतामढ़ी जयनगर सुपौल पूर्वी पूर्व चंपारण चंपारण पश्चिमी चंपारण यह सब सीमावर्ती इलाके हैं । सीमावर्ती इलाकों से माल पहले पटना आता है पटना से फिर भारतीय रेलवे से और ट्रांसपोर्ट से बाई रोड एसोसिएटेड रोड कैरियर एआरसी ट्रांसपोर्ट वीआरएल ट्रांसपोर्ट ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया टीसीआई ट्रांसपोर्ट जय मां अंबे ट्रांसपोर्ट एसकेएस के ट्रांसपोर्ट गैरेज इन सब पासपोर्ट से माल पटना से कानपुर जाता है और गोरखपुर से कानपुर जाता है। परंतु यह माल आता काठमांडू से है। काठमांडू नेपाल की राजधानी है और यह कच्ची सुपारी भूंजी सुपारी छोटी इलायची बड़ी इलायची नई दिल्ली भी जाती है। माल ट्रेन नंबर 12393 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से और सत्याग्रह एक्सप्रेस से माल नई दिल्ली जाता है। पटना से यह सब माल तस्करी और स्मगलिंग वाला रहता है जिसमे की 20त्न कस्टम ड्यूटी और 18त्न पर्सेंट जीएसटी की चोरी किया हुआ रहता है। यह सब माल बीएसएफ की आंखों में धूल झोंक के चोरी छुपे निकाला जाता है। नेपाल का जो बॉर्डर है भारत भारत के बिहार नेपाल बॉर्डर बिहार 750 किलोमीटर लंबी नेपाल के साथ सीमा साझा करता है और यह तस्करी सन 2010 से हो रही है और इसमें कई सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत है। प्रशासन इनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं करता।
रैकेट हवाला कारोबार से भी जुड़ा : तस्करी और स्मगलिंग का रैकेट हवाला कारोबार से भी जुड़ा हुआ है भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कोई भी व्यक्ति 25000 से ज्यादा नेपाल नहीं ले जा सकता कोई भी टूरिस्ट 25000 से ज्यादा नेपाल नहीं ले जा सकता अगर कोई 25000 से ज्यादा पैसा ले जाते हुए पकड़ा गया तो बीएसएफ उस पैसे को सीज जब्ती कर देता है । अब सवाल यह उठता है कि काठमांडू से प्रतिदिन करोड़ अरबो रुपए का माल आता है यह पेमेंट पटना से काठमांडू जाती कैसे हैं यह पेमेंट हवाला कारोबार के थ्रू 1 के नोट नंबर पर हवाला के थ्रूजाता है।
इंडिया से नेपाल हवाला रकम भेजने पर मिलता है कमीशन : हवाला कारोबार में अगर आप दिल्ली हवाला करोगे तो एक लाख पर 400 हवाला का जो दलाल है वह कमीशन लगाता है। अगर आप मुंबई हवाला करोगे तो एक लाख पर 500 हवाला हवाला का कमीशन ब्रोकर द्वारा लिया जाएगा अगर आप बेंगलुरु पेमेंट भेजोगे तो एक लाख पर 600 हवाला कारोबारी द्वारा कमीशन हवाला का लिया जाएगा इस तरीके से भारत के अलग-अलग शहरों का अलग-अलग कमीशन फिक्स है। अगर आप इंदौर हवाला करोगे तो एक लाख में 300 हवाला कमीशन लगेगा। अगर आप जबलपुर हवाला करोगे तो 1 लाख पर 200 से 300 हवाला कमीशन लगेगा इस तरीके से भारत के अलग-अलग शहरों पर अलग-अलग कमीशन हवाला के दलाल ब्रोकर द्वारा लिया जाता है। परंतु अगर आप भारत से काठमांडू पेमेंट भेजोगे भारत के किसी भी शहर से किसी भी सिटी से संपूर्ण भारत देश में किसी भी शहर से किसी भी सिटी से अगर आप काठमांडू नेपाल पेमेंट भेजने हैं तो उलटी गंगा बहती है यह जो दिल्ली के बड़े-बड़े हवाला कारोबारी है ये लोग एक लाख पर 2000 दो परसेंट उल्टा कमीशन देते हैं । अगर आपने 50 लख रुपए इंडिया से हवाला के थ्रू नेपाल भेजा तो दो परसेंट से आपको 100000 हवाले का कमीशन दिया जाएगा। उलटी गंगा बहेगी आपसे कमीशन लिया नहीं जाएगा एक लाख पर 2000 रुपए दो परसेंट आपको कमीशन दिया जाएगा अगर आप 50 लाख रुपए हवाला के थ्रू इंडिया से नेपाल भेजते हो तो दो परसेंट से आपको 100000 हवाला का कमीशन दिया जाएगा।
बड़े-बड़े कारोबारी करते हैं इंटरनेशनल हवाला का काम : यह हवाला के जो कारोबारी है यह 2त्न कमीशन उल्टा देते हैं यह जो भारत देश के बड़े-बड़े हवाला कारोबारी है जो इंटरनेशनल हवाले का काम करते हैं नेपाल भेजने पर 2त्न आपको कमीशन देते हैं उल्टा गंगा बहता है उल्टा आपको कमीशन देते हैं इसका कारण यह है यह जितने भी बड़े-बड़े हवाला के दलाल है यह मनी लॉन्ड्रिंग का काम करते हैं यह पैसे को धोते हैं लॉन्ड्रिंग करते हैं मतलब ब्लैक मनी को वाइट मनी में ट्रांसफर करते हैं अब जैसे किसी ने 50 लख रुपए यहां से इंडिया से काठमांडू भेजो इन भारत देश के बड़े-बड़े हवाला रैकेट के कारोबारी को इंडियन रूपीस की इंडियन पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए के लिए जरूरत रहती है यह लोग पैसा घूमते रहते हैं भारत से पेमेंट जाएगी नेपाल नेपाल से पेमेंट जाएगी सऊदी अरब सऊदी अरब से बहुत सारी मुस्लिम कंट्री है मुस्लिम कंट्री में पैसा जाएगा मुस्लिम कंट्री से फिर पैसा जाएगा यूएसए ,फिर पैसा जाएगा यूके, फिर पैसा जाएगा श्रीलंका, फिर पैसा जाएगा पाकिस्तान इस तरीके से कई देशों से घूमते-घूमते पैसा फिर वापस भारत देश में आ जाता है इन लोगों ने बड़े-बड़े सीए चार्टर्ड अकाउंटेंट जिस सीए कहा जाता है लगा रखे हैं इन लोगों ने बड़े-बड़े चार्टर अकाउंटेंट सीए लगा रखे हैं यह लोग बोगस फर्म बनाते हैं यह लोग बोगस कंपनी बनाते हैं यह कंपनी सिर्फ कागजों में रहती है वास्तविकता में कंपनी नहीं रहती। वैसे अगर ब्लैक मनी को वाइट मनी करना है तो 40त्न इनकम टैक्स लगता है परंतु यह हवाला कारोबारी सिर्फ 2त्न कमीशन देकर ब्लैक मनी को वाइट मनी में बदल देते हैं।
आर्थिक सुरक्षा और राजस्व के लिए गंभीर खतरा : भारत-नेपाल सीमा पर बड़े पैमाने पर हो रही एफएमसीजी (स्नड्डह्यह्ल रूश1द्बठ्ठद्द ष्टशठ्ठह्यह्वद्वद्गह्म् त्रशशस्रह्य) वस्तुओं की अवैध तस्करी की यह गतिविधि न केवल भारत की आर्थिक सुरक्षा और राजस्व के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि संगठित अपराध का रूप ले चुकी है।
नेपाल के उत्पाद भारी मात्रा में अवैध रूप से भारत तस्कर जरिए पहुंच रहा : नेपाल में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों- यूनिलीवर नेपाल लिमिटेड, डाबर नेपाल लिमिटेड, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, कोलगेट-पामोलिव नेपाल, पतंजलि नेपाल लिमिटेड, इमामी नेपाल लिमिटेड आदि के उत्पाद भारी मात्रा में अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर रहे हैं। नेपाल में कीमतें कम होने और मुद्रा विनिमय दर (1 = हृक्कक्र 1.60) का लाभ उठाकर तस्कर इन वस्तुओं को भारत में ऊँचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
हवाला के जरिए भुगतान
इस अवैध व्यापार में हवाला लेनदेन के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है, जिससे यह एक संगठित आपराधिक तंत्र का रूप ले चुका है। यह तस्करी मुख्यत: बिहार-नेपाल सीमा के निम्न जिलों से होकर होती है — पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, और किशनगंज।
विशेष ट्रेन से कच्चे माल की तस्करी
तस्करी का माल पहले पटना पहुँचाया जाता है, और वहाँ से नई दिल्ली (सदर बाजार, खारी बावली, रोहिणी) सहित देश के अन्य शहरों में रेलवे के माध्यम से भेजा जाता है। इस नेटवर्क में रेलवे और स्थानीय पुलिस कर्मियों की मिलीभगत की भी संभावना है। विशेष रूप से ट्रेन नंबर 12393 (संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस) और 15273 (सत्याग्रह एक्सप्रेस) की स्रुक्र/लीज बोगियों का उपयोग तस्करी के लिए नियमित रूप से किया जा रहा है।





