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राष्ट्रपति को खास अंदाज में कहा शुक्रिया
Delhi दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की यात्रा पूरी होने के बाद वहां के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के प्रति आभार जताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उज्बेकिस्तान सरकार और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की मेहमाननवाजी की सराहना करते हुए भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा, “धन्यवाद उज्बेकिस्तान! राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का आभार, उनकी गर्मजोशी, हर छोटी बात पर ध्यान देने और भारत-उज्बेकिस्तान मित्रता के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए।” प्रधानमंत्री के इस संदेश को दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई गति
पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है। उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और कनेक्टिविटी सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय संपर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की मेहमाननवाजी की तारीफ
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में विशेष रूप से राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की व्यक्तिगत भूमिका की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रपति के गर्मजोशी भरे व्यवहार और कार्यक्रम के दौरान छोटी-छोटी बातों पर दिए गए ध्यान का उल्लेख किया। पीएम मोदी का यह संदेश दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों और राजनीतिक विश्वास को भी दर्शाता है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं और नियमित बातचीत के जरिए संबंधों में लगातार मजबूती आई है।
मध्य एशिया में भारत की बढ़ती सक्रियता
भारत मध्य एशिया को अपनी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान देता है। इस क्षेत्र के साथ बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और रणनीतिक सहयोग भारत के लिए आर्थिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से अहम है। उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत संबंध भारत को मध्य एशिया में अपनी मौजूदगी और सहयोग को विस्तार देने में मदद कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। भारत की फिल्मों, संस्कृति और शिक्षा को लेकर उज्बेकिस्तान में लंबे समय से रुचि रही है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्ते केवल रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों के बीच संपर्क भी इसका अहम हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से यह संकेत मिलता है कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में व्यापार, निवेश, सुरक्षा, शिक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।
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